Russia Statement on Pakistan Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ घंटों से लगातार जंग जारी है। दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। इस बीच सीमा पर बढ़ते सशस्त्र संघर्ष को देखते हुए रूस ने दोनों देशों से तुरंत लड़ाई रोकने और अपने मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की है। बता दें कि पाकिस्तान ने गुरुवार रात को तालिबान के हमले का जवाब देते हुए 'ऑपरेशन गजब लिल हक' यानी कि 'न्याय के लिए जंग' शुरू की है। इस्लामाबाद का दावा है कि इस ऑपरेशन में 133 तालिबान लड़ाके मारे गए।
डूरंड लाइन को लेकर मचा है सारा बवाल
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2611 किलोमीटर लंबी सीमा को 'डूरंड लाइन' कहा जाता है, जिसे काबुल ने कभी आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। इसी सीमा को लेकर पिछले कुछ महीनों में दोनों देश कई बार आमने-सामने आए हैं। दोनों देशों में जारी तनाव के बीच रूसी विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 'कड़े सैन्य संघर्ष' पर गहरी चिंता जताई है। मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने बयान में कहा, 'इस लड़ाई में आर्मी, एयरफोर्स और भारी हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है। दोनों तरफ लोग हताहत हुए हैं, जिसमें आम नागरिक भी शामिल हैं।'
Image Source : APजंग के माहौल में पाकिस्तान के पेशावर में अखबार पढ़ते लोग।
'दोनों देश खतरनाक टकराव को छोड़ दें'
रूसी प्रवक्ता ने कहा, 'हम अपने मित्र देशों अफगानिस्तान और पाकिस्तान से अपील करते हैं कि वे इस खतरनाक टकराव को छोड़ दें और सभी मतभेदों को राजनीतिक व कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के लिए बातचीत की मेज पर लौट आएं।' क्रेमलिन के अफगानिस्तान के लिए विशेष दूत जमीर काबुलोव ने भी इस्लामाबाद और काबुल से दुश्मनी रोकने की मांग की। रिया नोवोस्ती समाचार एजेंसी के हवाले से उन्होंने कहा, 'हम आपसी हमलों को जल्द से जल्द खत्म करने और मतभेदों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के पक्ष में हैं।'
ख्वाजा आसिफ ने किया है जंग का ऐलान
बता दें कि मौजूदा संघर्ष दोनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी का नतीजा है, जहां सीमा पार से हमले और जवाबी कार्रवाई आम हो गई है। रूस ने दोनों देशों को शांति की राह अपनाने की सलाह दी है ताकि क्षेत्र में और बड़ा संकट न पैदा हो। हालांकि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है और मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों देशों के बीच तल्खी कम होने की उम्मीद थोड़ी कम ही नजर आ रही है।
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