तेल अवीव: इजरायल की सिविल कमीशन की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमास के नेतृत्व में 7 अक्टूबर को हुए हमलों और उसके बाद यौन हिंसा सुनियोजित, व्यापक और उसका एक अभिन्न अंग थी। "साइलेंस्ड नो मोर" शीर्षक वाली यह रिपोर्ट मंगलवार को प्रकाशित की गई। बता दे कि सिविलकमीशन यह एक स्वतंत्र समूह है जो 2023 में इज़राइल पर हमास के हमले के बाद हुई हिंसा की घटनाओं की गहराई से पड़ताल कर रही है थी। इस रिपोर्ट में दो साल तक चली जांच का विस्तार से ब्यौर दिया गया है। 400 से अधिक गवाहियों और लगभग 2,000 घंटों के दृश्य विश्लेषण का सहारा लिया गया है। हिंसा के 13 अलग-अलग तरीकों को दस्तावेज़ित किया गया है, जिनमें गैंगरेप, यौन यातना और ज़बरदस्ती नग्न करना शामिल है।
जानबूझकर अपनाई गई यौन हिंसा की रणनीति
सिविल कमीशन की संस्थापक, अध्यक्ष और रिपोर्ट की मुख्य लेखिका कोचाव एल्कायम-लेवी ने कहा, "हमारे निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि पीड़ितों और बंधकों पर ढाए गए आतंक की व्यापक रूपरेखा के भीतर यह एक जानबूझकर अपनाई गई रणनीति थी।" बता दें कि इजरायल पर हुए हमले के बाद गाजा में बड़े पैमाने पर इजारयल सैन्य कार्रवाई की थी। गाज़ा में युद्ध शुरू होने के बाद से यौन हिंसा का मुद्दा काफी हद तक राजनीतिक रंग ले चुका है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के आरोपों को झूठा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
हमास की क्रूरता उजागर
इजरायल ने 7 अक्टूबर के हमलों के दौरान हुई घटनाओं और बंधकों के साथ किए गए बर्ताव का हवाला देते हुए यह उजागर करने की कोशिश की है कि हमास कितना क्रूर है। साथ ही, उसने गाज़ा से भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को रोकने के अपने युद्धकालीन लक्ष्य को सही ठहराने के लिए भी इन घटनाओं का ज़िक्र किया है। इज़रायली सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर यौन हिंसा के सबूतों को नज़रअंदाज़ करने या उन्हें कम करके दिखाने का आरोप लगाया है, और इसे इज़रायल-विरोधी पूर्वाग्रह बताया है।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) द्वारा इस रिपोर्ट के निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है, और आलोचकों ने एल्कायम-लेवी के पिछले कुछ शोधों पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, हिलेरी रोडहम क्लिंटन, रहम इमैनुएल और फेसबुक की अग्रणी हस्ती शेरिल सैंडबर्ग सहित कई प्रमुख हस्तियों ने उनके काम का समर्थन किया है।
संयुक्त राष्ट्र ने यौन हिंसा की पुष्टि की
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसे यह मानने के "उचित आधार" मिले हैं कि हमास के आतंकवादियों ने अपने हिंसक तांडव के दौरान बलात्कार और अन्य प्रकार की यौन हिंसा की थी। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के अभियोजक करीम खान ने कहा है कि उनके पास यह मानने का कारण है कि हमास के तीन प्रमुख नेता "मानवता के विरुद्ध अपराधों के तौर पर बलात्कार और यौन हिंसा के अन्य कृत्यों" के लिए ज़िम्मेदार थे।
जेलों में भी यौन हिंसा
मानवाधिकार समूहों और हमलों के बाद इज़रायल द्वारा हिरासत में लिए गए फ़िलिस्तीनियों ने भी इजरायल की जेलों में यौन हिंसा और यातना के विस्तृत बयानों को शेयर किया है। मार्च में, इज़रायल ने 5 सैनिकों के ख़िलाफ़ आरोप हटा दिए। इन सैनिकों पर एक फ़िलिस्तीनी क़ैदी को पीटने और उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप था। यह कथित हमला आंशिक रूप से कैमरे में भी क़ैद हो गया था। कट्टरपंथी राजनेताओं ने, जिन्होंने इन आरोपों का ज़ोरदार विरोध किया था, आरोपों को हटाने के फ़ैसले का स्वागत किया; वहीं मानवाधिकार समूहों ने कहा कि यह इज़राइल की तरफ़ से दुर्व्यवहार की जांच करने की अनिच्छा को दर्शाता है।
इस आयोग में शोधकर्ताओं, वकीलों और ट्रॉमा विशेषज्ञों की एक टीम शामिल थी। इसने डिजिटल सामग्री इकट्ठा की, इंटरव्यू लिए और गवाहियों को फ़िल्माया। आयोग ने बताया कि उसने स्वतंत्र डेटा स्रोतों का उपयोग करके जानकारी की क्रॉस-चेकिंग भी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमास और उसके सहयोगियों ने मुख्य रूप से महिलाओं और बंधकों को निशाना बनाया, लेकिन बच्चों को भी हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया।
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