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परमाणु ऊर्जा को लेकर देश में खास मतदान करा रहा ताइवान, चीन को होगी भारी टेंशन

ताइवान में परमाणु ऊर्जा के बंद पड़े संयंत्र को दोबारा शुरू करने को लेकर जनमत संग्रह कराया जा रहा है। इसके साथ ही उन विपक्षी सांसदों को हटाने के लिए वोटिंग हो रही है, जो चीन के समर्थक माने जाते हैं।

ताइवान में वोटिंग (फाइल)- India TV Hindi Image Source : AP ताइवान में वोटिंग (फाइल)

ताइपे:ताइवान में शनिवार को एक अजीब वोटिंग कराई जा रही है। इसके तहत मतदाता यह फैसला करेंगे कि क्या सात विपक्षी सांसदों को विधायिका से हटाया दिया जाए और साथ ही यह भी कि क्या पांच महीने पहले बंद किए गए अंतिम परमाणु रिएक्टर को फिर से शुरू किया जाए। ताइवान के इस कदम से निश्चित रूप से चीन को भारी टेंशन होगी। क्योंकि चीन नहीं चाहता कि ताइवान के बंद परमाणु रिएक्टर फिर से शुरू हों।

राइट टू रिकॉल के तहत वोटिंग

यह दूसरा रीकॉल मतदान एक महीने के भीतर हो रहा है, जिसका उद्देश्य 2024 के चुनाव में बहुमत खो चुकी सत्ताधारी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) द्वारा विधायिका में अपना नियंत्रण फिर से स्थापित करना है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने की संभावनाएं कम हैं, क्योंकि 26 जुलाई को हुए पहले रीकॉल मतदान में विपक्षी नेशनलिस्ट पार्टी (KMT) के सभी 24 सदस्य बचे रहे थे।

डीपीपी ने जीता था राष्ट्रपति चुनाव

DPP ने 2024 में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता था, लेकिन 113 सीटों वाली विधायिका में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला।
कुओमिंतांग (KMT) कही जाने वाली नेशनलिस्ट पार्टी ने 52 सीटें जीतीं थीं, जोकि DPP से एक अधिक थीं। नेशनलिस्टों ने तीसरी पार्टी, ताइवान पीपल्स पार्टी (TPP) के साथ मिलकर कानून पास करना शुरू किया है, जिससे सत्तारूढ़ DPP परेशान है।

परमाणु ऊर्जा पर जनमत संग्रह

DPP परमाणु ऊर्जा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर रही है, जो कभी ताइवान की लगभग 20% बिजली आपूर्ति करती थी। स्वशासित द्वीप के तीन परमाणु संयंत्रों में से अंतिम चालू रिएक्टर को मई में 40 वर्षों की सेवा के बाद बंद कर दिया गया था। लेकिन उसी महीने, ताइवान पीपल्स पार्टी के एक प्रस्ताव को विधायिका ने मंजूरी दी, जिसमें परमाणु ऊर्जा को फिर से शुरू करने पर जनमत संग्रह कराने की बात थी और इसमें नेशनलिस्ट पार्टी का समर्थन भी शामिल था।

जनता से पूछा गया ये सवाल

जनमत संग्रह में मतदाताओं से पूछा गया है कि क्या हाल ही में बंद किए गए परमाणु संयंत्र को दोबारा चालू किया जाना चाहिए, बशर्ते नियामकों को यह सुरक्षित लगे। यह संयंत्र मानशान संयंत्र कहलाता है और ताइवान के दक्षिणी छोर की ओर स्थित है। परमाणु ऊर्जा के समर्थकों का कहना है कि इससे बिजली के बिल कम होंगे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

अमेरिका कर रहा परमाणु ऊर्जा का समर्थन

अमेरिका भी ताइवान के परमाणु ऊर्जा के समर्थन में है। अमेरिकी चिप कंपनी Nvidia के ताइवान में जन्मे संस्थापक जेंसन हुआंग ने भी इस मुद्दे पर शुक्रवार को राजधानी ताइपेई में हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद परमाणु ऊर्जा का समर्थन किया। AI की ऊर्जा आवश्यकताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी विकल्पों की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “सौर और पवन ऊर्जा जैसी बेहतरीन टिकाऊ ऊर्जा तकनीकें मौजूद हैं और परमाणु भी एक बेहतरीन विकल्प है।” मई में, Nvidia ने घोषणा की थी कि वह ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी Foxconn के साथ मिलकर द्वीप के शोधकर्ताओं और कंपनियों के लिए एक AI सुपरकंप्यूटर बनाएगी। (AP)

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