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बांग्लादेश की आजादी के बाद ढाका से चुना गया पहला हिंदू सांसद, BNP के गयेश्वर चंद्र रॉय ने जमात कैंडिडेट को हराया

बांग्लादेश से हिंदुओं के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। ढाका-3 से गयेश्वर चंद्र रॉय ने पहले हिंदू सांसद के रूप में जीत दर्ज की है। वह बीएनपी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, जिन्होंने जमात के उम्मीदवार शाहिनुर इस्लाम को हरा दिया है।

गयेश्वर चंद्र रॉय, ढाका-3 से चुनाव जीतने वाले हिंदू सांसद।- India TV Hindi Image Source : X@ITZBDHINDUS गयेश्वर चंद्र रॉय, ढाका-3 से चुनाव जीतने वाले हिंदू सांसद।

ढाकाः बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के शुक्रवार को आए नतीजों में आजादी के बाद ढाका से पहला हिंदू सांसद चुना गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हिंदू लीडर गयेश्वर चंद्र रॉय ने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार शाहिनुर इस्लाम को हरा दिया है। यह बांग्लादेश की आजादी के बाद ऐसा पहला मौका है, जब ढाका से कोई हिंदू सांसद चुना गया है। 

 बांग्लादेश के द बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार ढाका के रिटर्निंग ऑफिसर और जिला आयुक्त एमडी रेजाउल करीम ने बताया कि ढाका-3 में बीएनपी उम्मीदवार गयेश्वर चंद्र रॉय ने 98,785 वोटों से जीत हासिल की। उनका निकटतम प्रतिद्वंद्वी, जमात-ए-इस्लामी उम्मीदवार एमडी शाहिनुर इस्लाम को 82,232 वोट मिले। गयेश्वर चंद्र रॉय बीएनपी के वरिष्ठ नेता और हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरे हैं। उनकी यह जीत ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि यह ढाका से 1971 की स्वतंत्रता के बाद चुने गए वह पहले हिंदू सांसद बन गए हैं। 

कौन हैं गयेश्वर चंद्र रॉय?

गयेश्वर चंद्र रॉय लंबे समय से बीएनपी में सक्रिय हैं और अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं। बीएनपी ने उन्हें ढाका-3 संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था, जहां से उन्होंने पार्टी को जीत दिलाई है। इस सीट से जीतने वाले वह पहले हिंदू सांसद बन गए हैं। इससे हिंदू संगठनों में खुशी की लहर है। वहीं जमात-ए-इस्लामी ने अपना एकमात्र हिंदू उम्मीदवार कृष्ण नंदी को खुलना-1 (दाकोप-बोटियाघाटा) से उतारा था, लेकिन वे 50,000+ वोटों के बड़े अंतर से हार गए।

बीएनपी के अमीर एजाज खान ने वहां जीत हासिल की है। इस चुनाव में हिंदू मतदाताओं की भागीदारी अच्छी रही, लेकिन अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी रहीं। बीएनपी की जीत (200+ सीटों की ओर) से उम्मीद है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में अल्पसंख्यक मुद्दों पर बेहतर नीति आएगी। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद पहला प्रमुख चुनाव था, जहां अवामी लीग भाग नहीं ले सकी। गयेश्वर चंद्र रॉय की जीत बीएनपी की समावेशी छवि को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

गयेश्वर का राजनीतिक सफर

गयेश्वर का जन्म 1 नवंबर 1951 को ढाका जिले के केरानीगंज में एक बंगाली हिंदू परिवार में हुआ। पिता का नाम ज्ञानेंद्र चंद्र रॉय और माता का नाम सुमति रॉय था। उनके 2 बच्चे अमिताव रॉय और अपर्णा रॉय हैं। उनका परिवार बीएनपी से गहराई से जुड़ा है। उनके बेटे अमिताव की शादी बीएनपी नेता निताई रॉय चौधरी की बेटी निपुण रॉय चौधरी से हुई है। उन्होंने राजनीति में अपनी शुरुआत 1970 के दशक में जातीय समाजतांत्रिक दल से की, लेकिन 1978 में बीएनपी के युवा विंग जातीयताबादी जुबो दल में शामिल हो गए। 1987 से 2002 तक वे जुबो दल के महासचिव रहे। 1991 में बीएनपी की सरकार बनने पर वे राज्य मंत्री बनाये गए। उन्होंने पहले पर्यावरण और वन मंत्रालय में, फिर मत्स्य और पशुपालन मंत्रालय में काम किया। उन्हें यह पद तकनीकी कोटा के तहत दिया गया था।

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