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भारत से संबंध सुधारने के लिए ट्रंप ने दिल्ली भेजी टीम, विदेश मंत्री जयशंकर के साथ कई मुद्दों पर हुई अहम वार्ता

भारत से संबंध सुधारने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 सदस्यीय कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल को नई दिल्ली भेजा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि डेलीगेशन के साथ कई मुद्दों पर हुई अहम वार्ता हुई।

अमेरिकी डेलीगेशन के साथ नई दिल्ली में वार्ता करते विदेश मंत्री एस जयशंकर।- India TV Hindi Image Source : X@DRSJAISHANKAR अमेरिकी डेलीगेशन के साथ नई दिल्ली में वार्ता करते विदेश मंत्री एस जयशंकर।

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब भारत से संबंधों को सुधारने का प्रयास शुरू कर दिया है। अमेरिका को जब यह बात समझ आ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत झुकने वाले नहीं हैं तो ट्रंप ने अपना एक डेलीगेशन नई दिल्ली भेजा है। इस अमेरिकी कांग्रेस डेलीगेशन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ रविवार को बैठक की। इस बैठक का मकसद भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करके संबंधों को मजबूत बनाना है। 

बैठक में इन मुद्दों पर हुई वार्ता

भारत-अमेरिका के बीच हुई इस बैठक में व्यापार और सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर बात हुई। दोनों देशों के बीच संबंधों में जारी तनाव के बीच यह मुलाकात है। बैठक में मौजूद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे “उत्पादक” बताया और कहा कि बातचीत का मुख्य फोकस सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने पर रहा। अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में जिमी पैट्रोनिस, माइक रोजर्स और एडम स्मिथ शामिल थे। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

जयशंकर ने एक्स पर किया पोस्ट

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में बैठक में वार्ता को अच्छी बताया और लिखा, “भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं, इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा हुई। कांग्रेस के साथ बातचीत हमेशा हमारे रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।” इसके बाद अमेरिकी राजदूत गोर ने भी X पर उन्हें टैग करते पोस्ट किया। कहा हमने अमेरिका-भारत साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इसमें मजबूत सुरक्षा, विस्तारित व्यापार और महत्वपूर्ण तकनीकों पर सहयोग शामिल है।”

ट्रंप द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने से बिगड़े संबंध

बता दें कि भारत-अमेरिका संबंधों में बड़ा तनाव तब आया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया, जिसमें रूसी तेल खरीद पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी शामिल था। पिछले साल दोनों पक्षों ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की वार्ताएं कीं, लेकिन समझौता अभी तक नहीं हो सका। मुख्य कारण वाशिंगटन की मांग है कि भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को खोले। टैरिफ के अलावा, संबंधों पर अन्य मुद्दों से भी दबाव पड़ा, जिनमें पिछले साल मई में ट्रंप का भारत-पाकिस्तान संघर्ष खत्म करने का दावा और वाशिंगटन की नई आप्रवासन नीति शामिल हैं। यह बैठक दोनों देशों के बीच संसदीय स्तर पर संवाद को मजबूत करने और व्यापार-रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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