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जी-7 शिखर सम्मेलन की चर्चा में नहीं आए डोनाल्ड ट्रंप, खाली रही कुर्सी

जी-7 शिखर सम्मेलन में यहां जलवायु के मुद्दे पर हुई चर्चा में एक कुर्सी खाली पड़ी रही। दरअसल, अन्य वैश्विक नेताओं के साथ चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल नहीं हुए।

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बिआरित्ज (फ्रांस): जी-7 शिखर सम्मेलन में यहां जलवायु के मुद्दे पर हुई चर्चा में एक कुर्सी खाली पड़ी रही। दरअसल, अन्य वैश्विक नेताओं के साथ चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल नहीं हुए। हालांकि, वैश्विक शक्तियों ने आग प्रभावित अमेजन वर्षा वन को मदद पहुंचाने के तौर तरीकों और कार्बन उत्सर्जन घटाने पर चर्चा की। जलवायु, जैव विविधता और सागर’ पर सोमवार के सत्र में ट्रंप के हिस्सा लेने का कार्यक्रम था लेकिन संवाददाताओं को जितनी देर इस चर्चा को देखने की इजाजत दी गई, तब तक उनकी कुर्सी खाली पड़ी रही। 

फ्रांस के इस समुद्र तटीय शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन के मेजबान एवं फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ट्रंप के बजाय वहां उनके सहयोगी थे। ट्रंप जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर थोड़े संशयवादी हैं। उन्होंने कभी दावा किया था कि यह (मुद्दा) फर्जी है, जो चीनियों की उपज है। वर्ष 2015 के पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने का उनके फैसले ने कार्बन उत्सर्जन घटाने की वैश्विक कोशिशों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। 

ट्रंप ने सुबह से ही अपने कार्यक्रम की शुरूआत देर से की और जब अन्य वैश्विक नेता जलवायु परिवर्तन पर चर्चा में थे, उस दौरान उन्होंने वैश्विक नेताओं से एक-एक कर बैठकें की। जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ उनकी बैठक करीब दो घंटे देर से हुई। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जहां उनसे जलवायु परिवर्तन में शरीक होने के बारे में पूछा गया। 

ट्रंप ने कहा कि यह उनका अगला पड़ाव होगा और वह स्वच्छ हवा एवं पानी चाहते हैं लेकिन वह उसमें नहीं दिखे। मैक्रों ने कहा कि जलवायु समझौते में फिर से शामिल होने के लिए ट्रंप को मनाना उनका (मैक्रों का) लक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘आप अतीत को फिर से नहीं लिख सकते।’’ 

हालांकि, मैक्रों ने कहा कि अमेजन जंगलों में लगी आग पर ट्रंप की एक लंबी और पूरी तरह से सकारात्मक चर्चा हुई। जी-7 देशों ने अमेजन वर्षावन में लगी आग का मुकाबला करने के लिए दो करोड़ डॉलर की मदद का सोमवार को संकल्प लिया। सोमवार की जलवायु वार्ता में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस भी शरीक हुए। उन्होंने आशा जताई कि यदि अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं भी चाहेंगे तो भी अमेरिकी खुद ही जलवायु परिवर्तन से लड़ेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अमेरिकी समाज को लेकर बहुत आशावादी हूं।’’

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