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होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने के प्रयासों में शामिल होगा जर्मनी? ईरान से चल रही है सीधी बातचीत

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि ईरान के साथ वार्ता चल रही है। उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि जर्मनी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने के प्रयासों में भूमिका निभा सकता है।

German Chancellor Friedrich Merz- India TV Hindi
Image Source : AP German Chancellor Friedrich Merz

Germany Talks With Iran: जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का कहना है कि अगर ईरान और अमेरिका किसी शांति समझौते पर राजी हो जाते हैं और कुछ शर्तें पूरी हो जाती हैं जर्मनी होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के प्रयासों में शामिल होगा। मर्ज ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि ट्रंप का इरादा किसी सभ्यता को पूरी तबाह करना नहीं है। जर्मनी ईरानी नेतृत्व के साथ सीधी बातचीत भी कर रहा है। 

तेहरान के साथ कर रहे हैं बातचीत

फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, "लंबे समय तक चुप्पी के बाद, जिसके पीछे तमाम कारण थे, अब हम एक सरकार के तौर पर तेहरान के साथ बातचीत फिर से शुरू कर रहे हैं।" यह बातचीत अमेरिका और यूरोपीय साझेदारों के तालमेल से होगी। मर्ज ने कहा कि लेबनान में इजरायल का लगातार जारी सैन्य अभियान खास चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इससे पूरी शांति प्रक्रिया विफल हो सकती है और ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने दिया जाना चाहिए।

होर्मुज स्ट्रेट में प्रभावित हुआ नौवहन

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस इलाके में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। अब जब दोनों देशों के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर हुआ है तो जर्मनी इसे सकारात्मक कदम मान रहा है।

जंग का समर्थन नहीं करता है जर्मनी

मर्ज ने लेबनान में इजरायल के हमलों पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लेबनान में इजरायल की कार्रवाई की तीव्रता शांति प्रक्रिया को नाकाम कर सकती है। जर्मनी का रुख साफ है कि वह जंग का समर्थन नहीं करता, बल्कि कूटनीति और बातचीत पर जोर देता है। चांसलर मर्ज ने ट्रंप से भी फोन पर बात की है। इसमें मुख्य रूप से मौजूदा स्थिति और आगे के कदमों पर चर्चा हुई है।

स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा जर्मनी

मर्ज ने साफ कहा कि जर्मनी ट्रांस-अटलांटिक संबंधों (अमेरिका-यूरोप) को मजबूत रखना चाहता है, लेकिन साथ ही अपनी स्वतंत्र विदेश नीति भी बनाए रखेगा। ईरान के साथ सीधी बातचीत शुरू करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह घटनाक्रम तब हो रहा है जब मध्य पूर्व में पिछले कई महीनों से तनाव चरम पर था। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी थी। अब सीजफायर के बाद उम्मीद जगी है कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध रुक सकता है।

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