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ब्रिटेन में लीक हुई अफगान रिफ्यूजियों की जानकारी, जानें क्यों खतरनाक है डेटा में हुई ये सेंधमारी

ब्रिटेन की रक्षा मंत्रालय से जुड़ी कंपनी "द जेट सेंटर" में डेटा लीक से 3,700 लोगों की निजी जानकारी खतरे में है। इनमें अफगान नागरिक, ब्रिटिश सैनिक और पत्रकार शामिल हैं। लीक हुई जानकारी के कारण अफगानों की जान को तालिबान से गंभीर खतरा हो सकता है।

UK data leak, Afghan refugees data breach, Jet Centre UK hack- India TV Hindi Image Source : AP FILE इस डेटा लीक से तमाम अफगान शरणार्थियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

लंदन: एक बार फिर डेटा लीक की घटना ने हजारों लोगों की निजी जानकारी को खतरे में डाल दिया है। इस बार ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय से जुड़ी एक कंपनी, द जेट सेंटर ने बताया कि उनके सिस्टम में सेंधमारी हुई, जिसके कारण कुछ ईमेल्स तक अनधिकृत पहुंच बन गई। इस घटना से करीब 3,700 लोग प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें अफगान नागरिक, ब्रिटिश सैनिक और पत्रकार शामिल हैं।

क्यों बड़ा है डेटा की सेंधमारी का यह खतरा?

द जेट सेंटर, जो उड़ानों के लिए ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं देता है, ने शुक्रवार देर रात बताया कि उनके सिस्टम में एक सुरक्षा चूक हुई। इस चूक के कारण कुछ ईमेल्स में मौजूद संवेदनशील जानकारी गलत हाथों में जा सकती है। प्रभावित लोगों में वे अफगान शामिल हैं, जो ब्रिटेन की मदद से अफगानिस्तान से निकाले गए थे। इसके अलावा, सामान्य सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लेने वाले ब्रिटिश सैनिक और सरकारी मंत्रियों के साथ यात्रा करने वाले पत्रकार भी इस लीक का शिकार हो सकते हैं।

पहले भी लीक हो चुकी है अफगानों की जानकारी

यह पहली बार नहीं है जब अफगानों की जानकारी लीक हुई हो। फरवरी 2022 में भी एक सरकारी अधिकारी की गलती से 18,714 लोगों की निजी जानकारी गलत तरीके से सार्वजनिक हो गई थी। उस समय भी कई अफगानों की जान को खतरा हो गया था, जो तालिबान के सत्ता में आने के बाद ब्रिटिश फौजों के साथ काम करने के कारण निशाने पर थे।

कौन हैं ये अफगान, क्यों खतरे में है इनकी जान?

जिन अफगानों की जानकारी लीक हुई है, वे वो लोग हैं जो ब्रिटिश फौजों के साथ काम कर चुके हैं। इनमें अनुवादक (ट्रांसलेटर्स), फिक्सर्स (जो स्थानीय स्तर पर मदद करते थे), और अन्य भूमिकाओं में काम करने वाले लोग शामिल हैं। जब 2021 में तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता हासिल की, तो इन लोगों की जान को खतरा हो गया क्योंकि तालिबान इन्हें गद्दार मानता है। इसीलिए ब्रिटेन ने अफगान रिलोकेशन एंड असिस्टेंस पॉलिसी (ARAP) नामक एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत इन लोगों को ब्रिटेन में शरण दी गई।

अब इस डेटा लीक के कारण इन अफगानों की निजी जानकारी, जैसे नाम, पते या अन्य विवरण, तालिबान या अन्य खतरनाक समूहों के हाथ लग सकती है। इससे उनकी और उनके परिवारों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है।

ब्रिटिश सैनिक और पत्रकार भी निशाने पर

इस लीक में शामिल ब्रिटिश सैनिक वे हैं जो सामान्य सैन्य अभ्यासों (मिलिट्री एक्सरसाइज) के लिए यात्रा कर रहे थे। इसके अलावा, सरकारी मंत्रियों के साथ आधिकारिक दौरे पर गए पत्रकारों की जानकारी भी खतरे में है। अगर यह जानकारी गलत लोगों के पास पहुंचती है, तो इन सैनिकों और पत्रकारों की सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। इस लीक ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि क्या सरकार और उससे जुड़ी कंपनियां संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठा रही हैं। (AP)

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