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यूक्रेन ने रूस के तेल टर्मिनल पर किया सबसे भयानक ड्रोन हमला, काला सागर के पास उठने लगीं आग की भीषण लपटें

यूक्रेन ने रूस के तेल टर्मिनल पर भयानक ड्रोन हमला किया है। रूस का यह सबसे बड़ा तेल टर्मिनल है, जो काला सागर के पास स्थित है।

रूसी ऑयल टर्मिनल में भीषण आग (फाइल)- India TV Hindi Image Source : AP रूसी ऑयल टर्मिनल में भीषण आग (फाइल)

कीवः यूक्रेन ने लगातार दूसरे दिन रूस पर बड़ा ड्रोन हमला किया है। यूक्रेनी सेना ने शनिवार की रात काला सागर के किनारे स्थित रूस के तुआप्से ऑयल टर्मिनल पर भीषण ड्रोन हमला किया। इसके बाद वहां भयंकर आग की लपटें और काला धुआं उठता देखा जा रहा है। यह टर्मिनल रूस के सबसे बड़े तेल टर्मिनलों में से एक है। यह शनिवार रात अचानक आग की लपटों से घिर गया। रात के गहरे सन्नाटे को चीरती ड्रोन की गूंज ने बंदरगाह के ऊपर भय का साया फैला दिया।

 

यूक्रेन ने लिया रूस से बदला

यूक्रेन का यह हमला हाल ही में उसके पूर्वी क्षेत्र में सैन्य उपकरणों की सप्लाई मार्ग वाले पुल को उड़ाये जाने के बाद किया गया है। कहा जा रहा है कि यह हमला यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं द्वारा किया गया था, जो रूस के क्रास्नोदार क्राय क्षेत्र में एक बड़े पैमाने पर चलाए गए ड्रोन अभियान का हिस्सा था।

आसमान में हुए भीषण विस्फोट

इस भयानक ड्रोन हमले के चलते रूस के आसमान में चमकते विस्फोटों की झिलमिलाहट ने समुद्र के शांत पानी को भी लाल कर दिया। बंदरगाह के जो मजदूर कुछ देर पहले तक अपने रात्रि शिफ्ट के काम में व्यस्त थे, अचानक धुएं और आग की लपटों के बीच जीवन संघर्ष की दौड़ में शामिल हो गए। टर्मिनल की कई पाइपलाइनें फट चुकी थीं और तेल के रिसाव से आग ने और भी भयानक रूप ले लिया। 

 

घोषित हुआ आपातकाल

स्थानीय प्रशासन ने तुरंत आपातकाल घोषित कर दिया। फायर ब्रिगेड की दर्जनों गाड़ियां घटनास्थल की ओर दौड़ीं, लेकिन हर नई लपट उनके प्रयासों को चुनौती देती रही। हवा में तेल और जलते धातु की तीखी गंध भर गई थी। इस हमले ने न सिर्फ रूस की ऊर्जा व्यवस्था को झटका दिया, बल्कि तुआप्से के निवासियों के दिलों में डर और अनिश्चितता भी भर दी। सालों से इस तट पर काम कर रहे बूढ़े नाविक इवान जलते गोदामों को देखते हुए बोले-“समुद्र तो हमेशा से आग को बुझाता आया है, पर आज लगता है, लपटों ने सागर को भी जला दिया है।” रात धीरे-धीरे सुबह में बदल रही थी, लेकिन तुआप्से के आसमान पर धुएं का परदा अब भी टंगा था। यह संकेत कि युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, इंसानियत के दिलों में भी जल रहा है।

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