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'किताबों का शौकीन ओसामा अमेरिकी लेखकों को पढ़ता था'

वाशिंगटन: अमेरिका द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक आतंकवादी संगठन अल-कायदा का प्रमुख ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में छिपने के अंपने अंतिम वर्षो में किताबों में डूबा रहता था और कुशल संपादक था। सीएनएन

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'किताबों का शौकीन ओसामा अमेरिकी लेखकों को पढ़ता था'

वाशिंगटन: अमेरिका द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक आतंकवादी संगठन अल-कायदा का प्रमुख ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में छिपने के अंपने अंतिम वर्षो में किताबों में डूबा रहता था और कुशल संपादक था। सीएनएन की रपट के मुताबिक, बिन लादेन का डिजिटल पुस्तकालय से पता लगता है कि वह पढ़ने का बड़ा शौकीन था। उसके संग्रह में 'ओबामाज वॉर्स' नाम की किताब भी थी, जिसे बॉब वुडवर्ड ने लिखा था। बॉब ने इस किताब में लिखा था कि बराक ओबामा प्रशासन ने कैसे अमेरिकी सैनिकों को जबरन अफगानिस्तान में घुसाया। इसके साथ ही उसमें नोम चोम्स्की जैसे लेखकों की पुस्तकें शामिल थीं।

अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया कार्यालय के निदेशक द्वारा बुधवार को ओसामा की पुस्तकों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की गई। 'बिन लादेन बुकशेल्फ' नाम से जारी किए गए दस्तावेजों का अरबी से अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है।

वह एक जटिल संपादक था और उसके द्वारा लिखे गए कुछ पत्रकों को समझने के लिए 50 बार पढ़ना पड़ा। अमेरिकी सील को ओसामा के घर से उसके कम्प्यूटर और डिजिटल मीडिया से हजारों दस्तावेज मिले थे जिसमें से 103 दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है।

दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि ओसामा ने अरब क्रांति पर भी प्रतिक्रिया दी थी। अरब क्रांति की आग ओसामा के मरने से कुछ महीने पहले मध्यपूर्व के देशों में भड़की थी।

लादेन ने इस मध्यपूर्व की क्रांति पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं कहा हालांकि उसने निजी तौर पर पत्रों में इस बात को विस्तार से लिखा है। अपने लेखों में उसने सूचना क्रांति के नए कारकों को क्रांति के लिए प्रेरित करने में मदद करने वाला बताया। इसके अलावा उसने इसे मुस्लिम इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शुमार किया।

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