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हिंद और प्रशांत महासागरों के पानी में शोषित हुई अतिरिक्त गर्मी

वॉशिंगटन: ग्रीनहाउस गैसों की अतिरिक्त गर्मी हालिया वर्षों में प्रशांत और हिंद महासागरों के जल में शोषित हुई है जिससे पिछले दशक के दौरान पृथ्वी के तापमान में वृद्धि में कथित विराम का पता चल

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हिंद और प्रशांत महासागरों के पानी में अतिरिक्त गर्मी

वॉशिंगटन: ग्रीनहाउस गैसों की अतिरिक्त गर्मी हालिया वर्षों में प्रशांत और हिंद महासागरों के जल में शोषित हुई है जिससे पिछले दशक के दौरान पृथ्वी के तापमान में वृद्धि में कथित विराम का पता चल सकता है।
नासा के एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। संस्थान की कैलिफोर्निया स्थित जेट प्रोपल्शन लेबोरेटॅरी :जेपीएल: के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागरों की सतह से नीचे 100 मीटर से 300 मीटर की पर्त में पूर्व की तुलना में कहीं ज्यादा गर्मी है।

बीसवीं सदी के दौरान ग्रीनहाउस गैसों का सांद्रण बढ़ गया था और पृथ्वी पर गर्मी बढ़ गई। वैश्विक सतह के तापमान में भी वृद्धि हुई। हालांकि 21 वीं सदी में, इस पैटर्न में अस्थायी परिवर्तन हुआ।
अनुसंधानकर्ता जोश विलिस ने बताया कि ग्रीनहाउस गैसें अतिरिक्त गर्मी शोषित करती रहीं लेकिन 2000 के दशक से शुरू हो कर करीब 10 साल तक सतह के वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि रूक गई और एक तरह से यह ठंडी हो गई।

अध्ययन में अनुसंधानकर्ताओं ने समुद्री तापमान मापने के उपायों का विश्लेषण किया जिसमें करीब 3500 महासागर तापमान जांच के वैश्विक नेटवर्क के निष्कर्ष शामिल थे। इसे अर्गो एरे कहा जाता है।
इस पूरी कवायद से पता चलता है कि सतह के नीचे के तापमान में वृद्धि हो रही है। अध्ययन में पाया गया कि प्रशांत महासागर गर्म पानी वाली सतह का मुख्य स्रोत है।

 

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