अमेरिका ने ईरान के खिलाफ उठाया बड़ा कदम, वो कर ही दिया जिसकी उम्मीद थी
अमेरिका ने ईरान को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए है। प्रतिबंध ऐसे समय पर लगाए गए हैं जब ईरान में बिगड़ती अर्थव्यवस्था को लेकर लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

America Imposes New Sanctions In Iran: ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और अशांति के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई ईरानी सुरक्षा अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इनमें सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी (SCNS) के सचिव अली लारीजानी भी शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रेजरी विभाग ने 15 जनवरी 2026 को जारी बयानों में यह जानकारी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के बयान में कहा गया है कि ईरान के बहादुर नागरिक अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन शासन ने हिंसा और क्रूर दमन के जरिए जवाब दिया है। अमेरिका ने कुख्यात फरदीस जेल का भी नाम लिया है जहां महिलाओं के साथ क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार की रिपोर्ट्स आई हैं।
ईरानी सुरक्षा अधिकारियों पर प्रतिबंध
ट्रेजरी विभाग ने कई ईरानी सुरक्षा अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें अली लारीजानी प्रमुख हैं। लारीजानी पर आरोप है कि उन्होंने सुप्रीम लीडर खामेनेई के आदेश पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की वकालत की। ईरान के शैडो बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े 18 व्यक्तियों और संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। ये नेटवर्क ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल बिक्री से होने वाली आय को लॉन्डर करने में शामिल बताए जाते हैं।
ईरानी लोगों के साथ खड़ा है अमेरिका
अमेरिका की ओर से की गई यह कार्रवाई 2025 के नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम-2 को आगे बढ़ाने का हिस्सा है। अमेरिकी बयान में जोर दिया गया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरानी लोगों के साथ खड़ा है, जो अपने अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं। शासन अपने लोगों के कल्याण पर निवेश करने के बजाय दुनिया भर में अस्थिर करने वाली गतिविधियों को फंडिंग दे रहा है।
अमेरिका ने दी चेतावनी
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जब तक शासन दमन जारी रखेगा, वह ईरानी शासन को वित्तीय नेटवर्क और वैश्विक बैंकिंग सिस्टम से काटता रहेगा। ये प्रतिबंध दिसंबर 2025 से जारी ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच आए हैं, जो आर्थिक संकट, मुद्रा अवमूल्यन और राजनीतिक दमन के खिलाफ शुरू हुए थे और अब पूरे देश में फैल चुके हैं।
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