वाशिंगटन: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार बदलते रुख ने अमेरिका की जनता को भी असमंजस की स्थिति में ला दिया है। भी नाटो सहयोगियों से सैन्य मदद मांगना और अगले ही पल उनकी जरूरत न होने का दावा करना, ट्रंप के विरोधाभासी बयानों का हिस्सा बन गया है। तेहरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी देने और फिर ऐसे हमलों को लगभग रातोंरात स्थगित करने के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बदलते रुख को कोई समझ नहीं पा रहा है। इसे लेकर ट्रंप को सोशल मीडिया पर भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक
कुछ लोग उनका मजाक उड़ाते हुए "ट्रंप ऑलवेज चिकन्स आउट (टैको)" यानी "ट्रंप दबाव के चलते अपने फैसले वापस ले लेते हैं या टाल देते हैं" हैशटैग के तहत पोस्ट कर रहे हैं। ट्रंप ने मार्च की शुरुआत में रिपोर्टर्स के साथ बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने में यूरोपीय देशों के साथ-साथ पश्चिम एशिया से तेल एवं गैस की आपूर्ति पर निर्भर अन्य देशों से मदद मांगी थी। ट्रंप ने कहा था, "अगर हमें उनकी 'माइन बोट' की जरूरत हो या किसी भी चीज की, उनके पास मौजूद किसी भी उपकरण की, तो उन्हें हमारी मदद के लिए तुरंत आगे आना चाहिए। हम चाहते हैं कि वे आएं और हमारी मदद करें।"
उन्होंने हालांकि साथ ही यह भी कहा था, "मेरा मानना है कि हमें किसी की जरूरत नहीं है। हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं। हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है। हमें उनकी जरूरत नहीं है।" होर्मुज को खुला रखने में मदद की ट्रंप की अपील को यूरोपीय देशों, चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों से बेहद ठंडी प्रतिक्रिया मिली है। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी दी थी कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों को "नष्ट" कर देगा। अगले दिन ट्रंप ने ईरान में एक नेता के साथ बातचीत का हवाला देते हुए हमलों को स्थगित कर दिया, पहले पांच दिनों के लिए और फिर 10 दिनों के लिए।
ट्रंप अधिक आवेगी और भावुक
'व्हाइट हाउस हिस्टोरिकल एसोसिएशन' के पूर्व मुख्य इतिहासकार एडवर्ड लेंगल ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'रोल कॉल' से बातचीत में कहा, "युद्ध में कूदने के अपने कारणों का ठंडे दिमाग से और सोच-समझकर स्पष्टीकरण देने के बजाय ट्रंप कहीं अधिक आवेगी और भावुक लग रहे हैं। समस्या यह है कि किसी भी तरह से पीछे हटना या अपने रुख को नरम करना उनके अहंकार और दिखावे को ठेस पहुंचाता है।"
विश्वसनीयता जैसी कोई चीज नहीं रह गई
विदेश मामलों के विश्लेषक फरीद जकारिया ने 'वाशिंगटन पोस्ट' में प्रकाशित लेख में कहा, "दुनिया के लिए अब अमेरिकी विश्वसनीयता जैसी कोई चीज नहीं रह गई है, बल्कि यह एक अजीबोगरीब रियलिटी टेलीविजन शो बन गया है, जिसमें मुख्य अभिनेता संकटों से बचते हुए इधर-उधर भटकता है, इस उम्मीद में कि आज वह जो कहेगा, उससे कल के बयान से पैदा हुआ संकट हल हो जाएगा।"
ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को स्थगित करने के ट्रंप के फैसले का सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने खूब मजाक उड़ाया। 'टॉकिंग पॉइंट्स मेमो' के संस्थापक जोश मार्शल ने सोशल मीडिया मंच 'ब्लूस्काई' पर एक पोस्ट में कहा, "यहां इतने टैको हैं कि एक न्यू मैक्सिकन रेस्तरां शृंखला शुरू की जा सकती है।" "ट्रंप ऑलवेज चिकन्स आउट (टैको)" हैशटैग पिछले साल तब गढ़ा गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और फिर पीछे हट गए थे। 'प्यू रिसर्च' की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग दस में से छह यानी 61 प्रतिशत अमेरिकी ईरान के साथ युद्ध को लेकर ट्रंप के रवैये से असहमत हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि 37 प्रतिशत लोग युद्ध के पक्ष में हैं।
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