भारत इंडो-पैसिफिक सुरक्षा के लिए अहम सहयोगी, ट्रंप के सुरक्षा दस्तावेज में संबंधों को बेहतर बनाने पर दिया गया जोर
अमेरिका की हाल में जारी की गई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में भारत को खास महत्व दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाना जारी रखेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में इंडो-पैसिफिक का भी उल्लेख किया गया है।

India In Indo-Pacific Security: हाल ही में जारी 2025 की अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में भारत पर खासा जोर दिया गया है। अमेरिकी सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भारत के साथ विशेषकर ‘क्वाड’ के माध्यम से सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें नई दिल्ली को इंडो-पैसिफिक और उससे आगे आर्थिक, सुरक्षा और भू-राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक अहम भागीदार बताया गया है। कहा गया है कि अमेरिका भारत के साथ कमर्शियल (और अन्य) संबंधों को बेहतर बनाना जारी रखेगा ताकि नई दिल्ली को इंडो-पैसिफिक सुरक्षा में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। ‘क्वाड’ में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
भारत निभाएगा सक्रिय भूमिका
अमेरिकी सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी दस्तावेज इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को दुनिया की लगभग आधी जीडीपी का स्रोत बताता है। दस्तावेज इसे अगली सदी के प्रमुख भू-राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में से एक के रूप में देखता है। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहा गया है कि अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएगा, खासकर दक्षिण चीन सागर में खुले शिपिंग लेन को किसी एक शक्ति के प्रभुत्व से बचाने में।
इन क्षेत्रों भारत के साथ काम करना चाहता है अमेरिका
व्यापार और समुद्री सुरक्षा के अलावा, नई रणनीति यह साफ करती है कि अमेरिका भारत के साथ टेक, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर भी काम करना चाहता है। रणनीति सिर्फ भारत के साथ ही नहीं, बल्कि यूरोप, एशिया और अफ्रीका में सहयोगियों और भागीदारों के नेटवर्क के साथ तालमेल बनाने की बात भी कहती है। इसमें विश्व स्तर पर सप्लाई-चेन को लचीला बनाने पर भी जोर दिया गया है।
केंद्रीय भागीदार बना हुआ है भारत
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति पिछले नीतिगत ढांचों की तुलना में सूक्ष्म बदलाव को दिखाती है जिसमें भारत एक केंद्रीय भागीदार बना हुआ है। भारत को प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में पेश करने के बजाय व्यापार में आपसी तालमेल, और आर्थिक-सुरक्षा तालमेल पर अधिक फोकस है। बदलाव मूलरूप से दिखाता है कि वाशिंगटन अभी किस दिशा में सोच रहा है। यह स्पष्ट है कि भारत एशिया में एक संतुलन बनाने वाला नहीं बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और टेक नेटवर्क बनाने में एक प्रमुख भागीदार है।
भारत को लाया जा रहा है अमेरिका के करीब
ऐसे में इसे इस तरह से भी देखा जा सकता है कि, भारत को अमेरिका के पाले में और करीब लाया जा रहा है। व्यापार, प्रौद्योगिकी और व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की अहमियत साफ नजर आ रही है। वाशिंगटन को पता है कि भारत उसकी इंडो-पैसिफिक रणनीति और ऐसे गठबंधन बनाने के उसके प्रयास के लिए कितना महत्वपूर्ण है जो किसी भी एक देश को प्रमुख वैश्विक क्षेत्रों पर हावी होने से रोक सके।
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