डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ले चुके हैं। ट्रंप प्रशासन के कार्यभार संभालते ही अमेरिका ने भारत को महत्व को दर्शाया है। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ज ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अपनी पहली द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय बैठक की। विदेश मंत्री एस जयशंकर, डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए अमेरिका गए हुए हैं। दुनिया के दो सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो शीर्ष राजनयिकों के बीच यह बैठक अमेरिकी विदेश विभाग के फॉगी बॉटम मुख्यालय में हुई है। द्विपक्षीय बैठक से पहले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद पहली क्वाड मंत्रिस्तरीय बैठक हुई।
ट्रंप प्रशासन के बनते ही, भारत के साथ हुई पहली द्विपक्षीय बैठक
बता दें कि आमतौर पर अमेरिका में नए राष्ट्रपति के चयन के बाद पहली बैठक अमेरिका के पड़ोसी देश कनाडा या मैक्सिको के साथ बैठक होती है। हालांकि इस बार ऐसा नहीं हुआ है। इस बार अमेरिका ने अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक भारत के साथ की है। नए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और डॉ. एस जयशंकर के बीच द्विपक्षीय बैठक पूर्व विदेश मंत्री के आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण करने के एक घंटे से भी कम समय बाद हुई है। दोनों नेताओं ने इस दौरान व्यापक चर्चा की, जिसमें भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर गहन चर्चा की गई। एक घंटे से भी अधिक समय तक चली इस बैठक में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा भी शामिल थे।
एस जयशंकर ने लिखा पोस्ट
इस बैठक के खत्म होने के तुरंत बाद सचिव रुबियो और डॉ. एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय प्रेस को संबोधित किया। यहां दोनों ही नेताओं ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया। बैठक के बाद एस जयशंकर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट लिखते हुए कहा, विदेश मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद मार्को रुबियो से उनकी पहली द्विपक्षीय बैठक में मिलकर प्रसन्नता हुई। हमारी व्यापक द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा की, जिसके रुबियो प्रबल समर्थक रहे हैं। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। हमारे रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हूं।
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