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UNHRC में भारत के मोहम्मद हुसैन ने उड़ाई पाकिस्तान की धज्जियां, कहा-मानवाधिकार मामले में उसका रिकॉर्ड सबसे खराब

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत के प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन ने पाकिस्तान के कश्मीर एजेंडे की हवा निकाल दी। उन्होंने मानवाधिकार पर ज्ञान देने वाले पाकिस्तान को पहले अपने गिरेबां में झांकने की सलाह दी।

UNHRC में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर के.एस.मोहम्मद हुसैन। - India TV Hindi Image Source : X@RT_INDIA_NEWS UNHRC में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर के.एस.मोहम्मद हुसैन।

संयुक्त राष्ट्र/जिनेवा: भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी)में पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दी हैं। यूएनएचआरसी में  भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर के.एस.मोहम्मद हुसैन ने संकेतों में पाकिस्तान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वह मानवाधिकारों के क्षेत्र में दुनिया के सबसे खराब रिकॉर्ड वाले देशों में शामिल है। इसलिए ऐसे देश को (पाकिस्तान को) दूसरों को उपदेश देने के बजाय अपने ही देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ राज्य-प्रायोजित उत्पीड़न और व्यवस्थागत भेदभाव पर ध्यान देना चाहिए।

जिनेवा में पाकिस्तान की खिंचाई

भारत ने जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 60वें सत्र के दौरान आम चर्चा में पाकिस्तान की जमकर खिंचाई की। भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर के.एस.मोहम्मद हुसैन ने कहा, "हमें यह अत्यंत विडंबनापूर्ण लगता है कि दुनिया में सबसे खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड वाले देशों में से एक (पाकिस्तान) दूसरों को उपदेश देने का प्रयास कर रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "भारत के खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों के साथ इस प्रतिष्ठित मंच का दुरुपयोग करने वाले देश की नापाक कोशिशें उनके पाखंड को उजागर करती हैं। निराधार आरोप लगाने के बजाय उन्हें अपने देश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर होने वाले राज्य-प्रायोजित उत्पीड़न और भेदभाव पर आत्ममंथन करना चाहिए।"

पाकिस्तान ने उठाया था कश्मीर का मुद्दा

हुसैन ने यह जवाब पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाये जाने के बाद दिया। हालांकि हुसैन ने पाकिस्तान की जगह एक देश कहकर संकेतों में जवाब दिया। भारत पहले भी कई बार दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। हुसैन ने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों के मानवाधिकारों को सुनिश्चित करने और सतत विकास के लक्ष्यों को साकार करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को वियना घोषणा और कार्ययोजना (वीडीपीए) के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करनी चाहिए।

वियना घोषणा और कार्ययोजना को 1993 में आयोजित विश्व मानवाधिकार सम्मेलन के बाद अपनाया गया था, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की नींव को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में मानवाधिकारों को बढ़ावा देना और उनका संरक्षण सुनिश्चित करना है। (भाषा)

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