जो बाइडेन ने जाते-जाते ट्रंप को जमकर सुनाया, जानिए Farewell Speech में क्या कहा
जो बाइडेन ने अपनी आखिरी फेयरवेल स्पीच में कई मुद्दो पर अपनी बात कही। उन्होंने देश में अमीरों के बढ़ते प्रभाव और गलत सूचनाओं के खतरे पर जोर दिया। बाइडेन ने कहा कि यह समस्याएं अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकती हैं।

वाशिंगटन: जो बाइडेन ने अपने विदाई भाषण में अमेरिका को लेकर इस तरह की बातें कही हैं जो ना सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया भर में ये चर्चा का विषय बन गईं हैं। बाइडेन ने कहा कि उन्होंने गाजा में शांति की डील करा दी है। उनके प्रशासन ने आठ महीने की लगातार बातचीत के बाद, हमास और इजरायल में युद्धविराम और बंधक समझौते को कराया। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की।
'हो सकते हैं खतरनाक परिणाम'
बाइडेन ने देश में जड़ें जमा रहे धनवानों के समूह और अमेरिकियों के अधिकारों एवं लोकतंत्र का उल्लंघन कर रहे ‘तकनीकी-औद्योगिक परिसर’ के बारे में कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा, ‘‘आज, अमेरिका में अत्यधिक धन, शक्ति और प्रभाव वाला एक समूह पनप रहा है, जो हमारे पूरे लोकतंत्र, हमारे मूल अधिकारों और स्वतंत्रताओं एवं सभी के आगे बढ़ने के निष्पक्ष अवसर को खतरे में डाल रहा है।’’ उन्होंने ‘सत्ता को कुछ अति-धनवान लोगों के हाथों में खतरनाक तरीके से केंद्रित होने की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, ‘‘अगर सत्ता के उनके दुरुपयोग को अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो इसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।’
पूर्व राष्ट्रपति का किया जिक्र
पूर्व राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहॉवर द्वारा 1961 में पद छोड़ते समय सैन्य-औद्योगिक परिसर के बारे में दी गई चेतावनियों का हवाला देते हुए, बाइडेन ने कहा, ‘‘मैं तकनीकी-औद्योगिक परिसरों की संभावित वृद्धि को लेकर भी उतना ही चिंतित हूं, जिससे हमारे देश के लिए भी वास्तविक खतरा पैदा हो सकता है।’’
15 मिनट का संबोधन
बाइडेन ने अपने 15 मिनट के संबोधन में सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के लिए एक ‘मॉडल’ पेश किया और ट्रंप का नाम लिए बिना अपने उत्तराधिकारी को लेकर चिंता जताई। ‘ओवल ऑफिस’ में उनके द्वारा दिया गया यह भाषण घरेलू नीति और विदेश संबंधों पर उनका ताजा बयान था। इससे पहले उन्होंने इजरायल और हमास के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित युद्धविराम समझौते की घोषणा की, जिससे पश्चिम एशिया में एक साल से अधिक समय से जारी युद्ध समाप्त हो सकता है। बाइडेन ने कहा, ‘‘हमने जो कुछ भी साथ मिलकर किया है, उसका प्रभाव महसूस होने में समय लगेगा, लेकिन बीज बो दिए गए हैं और वो फसल के रूप में उगेंगे, जिसके बाद दशकों तक खिलेंगे।’’
यह भी पढ़ें:
अमेरिका ने भाभा समेत भारत के 3 परमाणु संस्थानों से हटाए प्रतिबंध, जानिए कैसे चीन को लगा झटका