India-EU फ्री ट्रेड डील से बौखलाया अमेरिका, भारतीयों के लिए H-1B वीजा में दिया बहुत बड़ा झटका
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता होने से अमेरिका की बौखलाहट बढ़ गई है। भारत-ईयू डील के बाद अमेरिका ने एच-1बी वीजा को लेकर बड़ा ऐलान किया है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ सकता है।

टेक्सासः भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता होने के बाद अमेरिका ने एच-1बी वीजा मामले में भारत को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका के टेक्सास राज्य ने ट्रंप के नये आव्रजन नियमों का समर्थन करते हुए राज्य विश्वविद्यालयों और एजेंसियों के लिए वीजा पर रोक लगा दी है। इससे भारतीय छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ा झटका लगना तय माना जा रहा है। अमेरिका की ओर से यह फैसला भारत-यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता होने के बिलकुल बाद लिया गया है। इससे अमेरिका की बौखलाहट इस बड़ी डील को लेकर साफ झलक रही है।
हाई-प्रोफेशनल्स भारतीयों के लिए मुश्किल की घड़ी
अमेरिका के टेक्सास राज्य के इस फैसले से हाई-प्रोफेशनल्स भारतीयों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो गई है। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने इस फैसले का ऐलान ट्रंप द्वारा H-1B वीजा आवेदकों के लिए 100,000 डॉलर की बढ़ोतरी की घोषणा के कुछ महीनों बाद किया है। टेक्सास राज्य ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आव्रजन पर सख्ती के समर्थन में H-1B वीजा आवेदनों पर राज्य एजेंसियों और विश्वविद्यालयों के लिए फ्रीज की घोषणा करके अमेरिका में हाई-प्रोफेशनल्स भारतीयों को बड़ा झटका दिया है।
एबॉट द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि H-1B वीजा कार्यक्रम के चलते अमेरिकियों को मिलने वाली नौकरियां विदेशी श्रमिकों के हाथों में चली गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ और सबसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों को आकर्षित करने के इच्छित उद्देश्य की बजाय इस कार्यक्रम का बहुत अधिक उपयोग उन नौकरियों को भरने के लिए किया गया है जो टेक्सासवासियों द्वारा भरी जा सकती थीं और होनी चाहिए थीं, लेकिन इसे उन्हें सौंप दिया गया जो हमारे राष्ट्र में वास्तव में विशेष और अपूर्ण श्रम आवश्यकताओं को पूरा करने के आते हैं।
2 साल के लिए लागू हुआ आदेश
एबॉट का H-1B वीजा को लेकर जारी यह आदेश 31 मई 2027 तक लागू रहेगा। रिपब्लिकन पार्टी से टेक्सास के गवर्नर बने एबॉट ने कहा कि यह फैसला टेक्सास को "अमेरिका का सबसे मजबूत आर्थिक इंजन" बनाए रखने की उनकी कोशिश का हिस्सा है, जिसे ट्रंप द्वारा आव्रजन पॉलिसी में बदलाव करके लागू किया जा रहा है। ह्यूस्टन क्रॉनिकल द्वारा उद्धृत संघीय डेटा से पता चलता है कि टेक्सास में H-1B वीजा आवेदकों में से अधिकांश निजी कंपनियों में काम करते हैं। हालांकि, सार्वजनिक संस्थानों में वीजा आवेदकों के मामले में कई H-1B वीजा धारक राज्य विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में नियोजित हैं। यह फैसला सीधे सार्वजनिक संस्थानों, मुख्य रूप से राज्य विश्वविद्यालयों, स्पतालों और अन्य एजेंसियों को प्रभावित करेगा।
टेक्सास गवर्नर ने 27 मार्च तक मांगी रिपोर्ट
टेक्सास गवर्नर ने आगे सभी राज्य एजेंसियों को 27 मार्च तक एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें नवीनीकरण के लिए जमा आवेदनों की संख्या, आवेदकों के मूल देश, वर्तमान वीजा धारकों की समाप्ति तिथियां आदि शामिल हों। ट्रंप की यह नई वीजा रोक भारतीयों के लिए एक और झटका है। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, अमेरिका में 5.2 मिलियन भारतीयों में से कम से कम 570,000 टेक्सास में रहते हैं। इसमें अमेरिका में स्थाई रूप से रहने वाले वे लोग भी शामिल हैं, जो खुद को भारतीय मूल होने की वजह से भारतीय ही मानते हैं। अमेरिका के अन्य राज्यों में बड़ी भारतीय आबादी है। इनमें न्यू जर्सी में 440,000, न्यूयॉर्क में 390,000 और इलिनोइस में 270,000है।
भारत से खफा हैं ट्रंप
भारत ने अमेरिका को उसके मनमाफिक व्यापार का दरवाजा नहीं खोला, इसलिए ट्रंप नई दिल्ली से खफा हैं। लिहाजा वह भारतीयों को मुश्किल में डालने वाले ऐसे फैसले लगातार ले रहे हैं। ट्रंप का वीजा कदम सितंबर 2025 में घोषित किया गया था, भारतीय समुदाय को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला है। यूएस सेंसस ब्यूरो के 2023 के अनुमान के अनुसार, अमेरिका में कम से कम 66% आप्रवासी भारतीय हैं। यह फैसला नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों की परीक्षा के समय आया है, जहां व्यापार और ट्रंप की टैरिफ बढ़ोतरी से प्रभावित हो रहा है, जिसमें भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। यह उच्च टैरिफ अमेरिकी सामानों पर और यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी तेल की खरीद पर लागू है।
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