A
Hindi News विदेश अमेरिका USA ने क्यों की चीनी छात्रों के वीजा में बंपर कटौती?..जिस पर भड़का चीन; ट्रेड डील के बाद क्या फिर बिगड़ेंगे रिश्ते?

USA ने क्यों की चीनी छात्रों के वीजा में बंपर कटौती?..जिस पर भड़का चीन; ट्रेड डील के बाद क्या फिर बिगड़ेंगे रिश्ते?

अमेरिका द्वारा चीनी छात्रों के वीजा में बंपर कटौती किए जाने से बीजिंग में बवाल मच गया है। चीनी छात्र अमेरिका के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। वहीं चीन ने अमेरिका के इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

मार्को रूबियो, अमेरिका के विदेश मंत्री (बाएं) और चीनी छात्र (दाएं)- India TV Hindi Image Source : AP मार्को रूबियो, अमेरिका के विदेश मंत्री (बाएं) और चीनी छात्र (दाएं)

वॉशिंगटन/बीजिंग: अमेरिका ने चीनी छात्रों के लिए वीज़ा नियमो में बड़ी सख्ती कर दी है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर चीनी छात्रों के वीजा में कटौती का ऐलान किया है। उसके इस फैसले ने अमेरिका में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हजारों चीनी छात्रों को चिंता और गुस्से में डाल दिया है। यह फैसला विशेष रूप से विज्ञान, तकनीकी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में पढ़ने वाले चीनी छात्रों को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका की शीर्ष यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले ऐसे छात्रों में सबसे ज्यादा चीनी हैं। लिहाजा अमेरिका के इस कदम से चीन बौखला गया है।

बता दें कि अमेरिकी विदेश विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से उन चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं के वीज़ा को अस्वीकार करना शुरू कर दिया है, जो कथित तौर पर चीन की सेना या "संवेदनशील तकनीकी परियोजनाओं" से जुड़े विश्वविद्यालयों से ताल्लुक रखते हैं। इस नई नीति का उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना बताया गया है, लेकिन इसके चलते हजारों योग्य छात्रों के भविष्य पर संकट आ गया है। हाल ही में अमेरिका के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों जैसे एमआईटी (MIT), स्टैनफोर्ट (Stanford), हार्वर्ड (Harvard), UC Berkeley — ने भी चिंता जताई है कि इस नीति से वैश्विक टैलेंट आकर्षित करने की क्षमता कमज़ोर हो सकती है।

चीनी छात्रों में क्यों है भारी नाराज़गी और तनाव?

अमेरिका के इस फैसले से उसके विभिन्न विश्वविद्यालयों में 2 से 4 साल की पढ़ाई कर चुके छात्र-छात्राओं का भविष्य भी दांव पर लग गया है। इससे छात्र भयानक गुस्से में हैं। बीजिंग में कई छात्र संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाई है। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्हें बिना किसी ठोस वजह के वीज़ा अस्वीकार कर दिया गया, जबकि उन्होंने पूरी तरह वैध तरीके से आवेदन किया था। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने वाली एक चीनी छात्रा ने कहा, "मैंने चार साल मेहनत की, रिसर्च प्रपोज़ल तैयार किया, और सबकुछ तय था। अब एक राजनीतिक फैसले ने मेरा सपना छीन लिया।"

अमेरिका पर क्यों बौखलाया चीन?

अमेरिका द्वारा चीनी छात्रों के वीज़ा में भारी कटौती और जांच प्रक्रिया को सख्त करने की घोषणा के बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने इस फैसले को "राजनीतिक और भेदभावपूर्ण" बताते हुए कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने गुरुवार को प्रेस वार्ता में कहा, "अमेरिका की यह कार्रवाई अनुचित है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विचारधारा का बहाना बनाकर चीनी छात्रों के वैध अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। इससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय छवि को भी भारी क्षति पहुंची है।"

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने वाशिंगटन को औपचारिक विरोध दर्ज करा दिया है और अमेरिका से मांग की है कि वह "अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करे, खासकर चीनी छात्रों के"। माओ निंग ने अमेरिका पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह फैसला स्वतंत्रता और खुलेपन की अमेरिकी छवि को ही ध्वस्त करता है।

अमेरिका ने क्यों उठाया चीन के खिलाफ ऐसा कदम?

दोनों देशों के बीच इस विवाद की शुरुआत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उस घोषणा से हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका अब "आक्रामक रूप से" उन चीनी छात्रों के वीज़ा रद्द करेगा जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हैं या "संवेदनशील क्षेत्रों" जैसे रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने हांगकांग के छात्रों के लिए भी वीज़ा जांच को सख्त करने की बात कही। रुबियो के अनुसार, यह कदम अमेरिका की सुरक्षा और विदेशी प्रभाव से बचाव के तहत लिया गया है। उन्होंने कहा, "हम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और हांगकांग से आने वाले सभी छात्र वीज़ा आवेदनों की गहन जांच करेंगे।" क्योंकि अमेरिका को ऐसे चीनी छात्रों से जासूसी और सुरक्षा का खतरा है। 

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में चीनी छात्रों की संख्या

चीनी छात्र लंबे समय से अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए राजस्व और प्रतिभा के एक प्रमुख स्रोत रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन की रिपोर्ट के अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में अमेरिका में 2.77 लाख चीनी छात्र पढ़ रहे थे। हालांकि इस साल भारत पहली बार छात्रों की संख्या मामले में चीन से भी आगे निकल गया। अब अमेरिकी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे ज्यादा भारतीय हैं।

अमेरिका और चीन के रिश्तों पर क्या होगा असर?

अमेरिका के इस फैसले से चीन के साथ उसके रिश्ते एक बार फिर से बहुत अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। बता दें कि हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील होने से दोनों के रिश्तों में तनाव काफी हद तक कम हुआ था, लेकिन अब चीनी छात्रों के वीजा में कटौती के अमेरिकी फैसले ने फिर से कड़वाहट बढ़ा दी है। इससे चीन भी अमेरिका के खिलाफ कई कड़े फैसले ले सकता है। हालांकि चीन इसका जवाब किस तरह से देगा, इस बारे में अभी कोई ऐलान नहीं किया गया है। मगर चीन के अड़ियल रुख और पूर्व के जवाबी फैसलों को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह फिर अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दे सकता है। इससे दोनों देशों के रिश्ते फिर से अत्यधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। 

 

Latest World News