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लॉकडाउन जारी रहने से कारोबारी गतिविधियों में आई और कमी, बेहतरी के लिये टीकाकरण जरूरी: नोमुरा

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : May 24, 2021 07:53 pm IST,  Updated : May 24, 2021 07:53 pm IST

श्रमिक की भागीदारी दर भी पिछले सप्ताह के 40.5 प्रतिशत से और कम होकर 39.4 प्रतिशत रह गई। बेरोजगारी दर भी इस अवधि में 14.4 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है।  

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अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन का असर Image Source : PTI

नई दिल्ली। कई राज्यों में लॉकडाउन जारी रहने से व्यावसायिक गतिविधियों में और गिरावट आई है। आर्थिक गतिविधियां अब पिछले साल जून के स्तर पर पहुंच गई है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने सोमवार को यह कहा। आर्थिक गतिविधियों का आकलन करने के लिये नोमुरा ने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान एक प्रापरिएटरी इंडेक्स की शुरुआत की थी। इसके मुताबिक मई में व्यावसायिक गतिविधियों पर सबसे ज्यादा असर होगा उसके बाद जून में इसमें धीरे धीरे सुधार की शुरुआत होगी। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, ‘‘लॉकडाउन जून में भी जा सकता है लेकिन वायरस के मामले घटने पर कुछ राज्य प्रतिबंधों को हटा सकते हैं, इससे माह दर माह आधार पर जून में गतिविधियां बेहतर हो सकती हैं।’’ नोमुरा के मुताबिक कारोबार शुरुआत सूचकांक 23 मई को समाप्त सप्ताह में गिरकर 60 पर आ गया जबकि इससे पिछले सप्ताह में यह 63 अंक पर था। सूचकांक का नया स्तर जून 2020 में अंतिम बार देखा गया था। 

नोमुरा की इस रिपोर्ट के मुताबिक आवागमन और बिना आवागमन वाले दोनों तरह के क्षेत्रों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसमें कहा गया है कि गूगल का वर्कप्लेस, रीटेल तथा मनोरंजन के लिये मोबिलिटी इंडेक्स 5 से 6 प्रतिशत अंक गिरा है। वहीं एप्पल का ड्राइविंग इंडेक्स तेज गिरावट के बाद 3.4 प्रतिशत अंक बढ़ा है। इसमें कहा गया है कि बिजली की मांग लगातार गिरावट दर्ज करती हुई पांच प्रतिशत कम हुई है। श्रमिक की भागीदारी दर भी पिछले सप्ताह के 40.5 प्रतिशत से और कम होकर 39.4 प्रतिशत रह गई। बेरोजगारी दर भी इस अवधि में 14.4 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह एक साल के शीर्ष स्तर के करीब है। 

नोमुरा ने कहा है कि आर्थिक क्षेत्र में परिस्थितियों में लगातार बेहतरी के लिये टीकाकरण बढ़ाने की जरूरत है जो कि जून के बाद ही होने की उम्मीद लगती है। इस बीच, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी ने कहा है कि उन्हें कोरोना वायरस की दूसरी लहर से प्रभावित अर्थव्यवस्था में ‘‘बेहतरी का पहला संकेत’’ दिखाई दिया है। 

 

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