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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: कुटुम्बा सीट पर क्या जीत की हैट्रिक लगा पाएंगे कांग्रेस के राजेश कुमार?

बिहार की कुटुम्बा सीट पर जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। संभावित उम्मीदवार जनता के बीच जा रहे हैं। इस साल होने वाले चुनाव में मुकाबला काफी रोचक हो सकता है।

kutumba assembly seat- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV कुटुंबा विधानसभा चुनाव।

कुटुम्बा: बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। कुटुम्बा विधानसभा सीट बिहार की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है, जहां पिछली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। यहां से कांग्रेस के राजेश कुमार लगातार दूसरी बार विधायक बने थे। इस सीट पर इस साल विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। इस बार बिहार की सियासत में काफी कुछ नया होने वाला है। एक तरफ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज मैदान में है, वहीं दूसरी तरफ आरजेडी से निष्कासित तेज प्रताप यादव भी चुनाव में उतरने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

क्या हैं साल 2020 और 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजे? 

बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक कुटुम्बा भी है। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में यहां से इंडियन नेशनल कांग्रेस के राजेश कुमार जीते थे। राजेश कुमार ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के श्रवण भुइयां को 16653 वोटों के मार्जिन से हराया था। राजेश कुमार को कुल 50822 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर श्रवण भुइयां को कुल 34169 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार के ललन राम रहे थे। उन्हें कुल 20433 वोट मिले थे। वहीं, आठवें नंबर पर NOTA रहा था। उसे कुल 2586 वोट पड़े थे।

साल 2015 के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस के राजेश कुमार जीते थे। उन्होंने HAM उम्मीदवार संतोष कुमार सुमन को 10098 वोटों के मार्जिन से हराया था। तब राजेश कुमार को कुल 51303 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे संतोष कुमार सुमन को कुल 41205 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार सुरेश पासवान रहे थे। उन्हें 6640 वोट मिले थे।

कैसा होगा साल 2025 का चुनाव?

इस बार कुटुम्बा सीट NDA के लिए सबसे बड़ा कार्य है उन लगभग 48% मतदाताओं को सक्रिय करना, जिन्होंने 2020 में मतदान नहीं किया। यही वर्ग महागठबंधन की पकड़ को कमजोर करने और राजेश कुमार की संभावित हैट्रिक को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। वैसे इस बार का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि नई सियासी पार्टी जनसुराज भी अपना भाग्य आजमा रही है।