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Hindi News बिहार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगा दिल्ली दंगों का आरोपी! शरजील इमाम के नाम की चर्चा तेज, नुककड़ सभाओं के जरिए कुछ लोग बना रहे माहौल

बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगा दिल्ली दंगों का आरोपी! शरजील इमाम के नाम की चर्चा तेज, नुककड़ सभाओं के जरिए कुछ लोग बना रहे माहौल

फिलहाल शरजील इमाम के किसी पार्टी के साथ जुड़ने की जानकारी नहीं है। लेकिन नुक्कड़ सभाओं के जरिए कुछ लोग शरजील के पक्ष में माहौल बना रहे हैं।

Sharjeel imam- India TV Hindi Image Source : REPORTER INPUT बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगा शरजील इमाम?

 दिल्ली दंगों के आरोपी और जेल में बंद शरीजल इमाम के बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक शरजील इमाम के पक्ष में कुछ लोग किशनगंज जिले की बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि शरजील इमाम बहादुरगंज विधानसभा सीट से किस्मत आजमा सकता है। 

फिलहाल शरजील इमाम के किसी पार्टी के साथ जुड़ने की जानकारी नहीं है। लेकिन नुक्कड़ सभाओं के जरिए कुछ लोग शरजील के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। बता दें कि बहादुरगंज विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य सीट है। वर्ष 2020 के चुनाव में इस सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी AIMIM के उम्मीदवार मोहम्मद अंजार नईमी ने जीत हासिल की थी। लेकिन बाद में नईमी ने पाला बदल लिया था और वे राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए थे।

Image Source : Reporter Inputशरजील इमाम के समर्थन में जनसभा

हालांकि अभी तक न तो शरजील इमाम की तरफ से या फिर किसी राजनीतिक दल की ओर से उसके चुनाव में उतरने की कोई औपचारिक घोषणा हुई है, लेकिन बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह का माहौल बन रहा है, और कुछ लोग शरजील के पक्ष में माहौल बनाते नजर आ रहे हैं, उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि इस विधानसभा सीट से शरजील सियासत में दांव आजमा सकता है।

कौन है शरजील इमाम

जेएनयू के छात्र शरजील इमाम पर फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, शरजील ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसे भाषण दिए, जिन्होंने न केवल लोगों को उकसाया बल्कि सांप्रदायिक हिंसा के लिए जमीन तैयार करने में भी मदद की।

शरजील इमाम पर आरोप  है कि उसने दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) सहित कई जगहों पर भड़काऊ भाषण दिए। इन भाषणों में विशेष रूप से "चक्का जाम" का आह्वान और असम समेत पूर्वोत्तर को भारत के बाकी हिस्सों से "काटने" की बात ने बड़ा विवाद खड़ा किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन भाषणों का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच नफरत पैदा करना और लोक सेवकों के प्रति अवमानना भड़काना था, जिसने अंततः हिंसा का रूप लिया।