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Hindi News बिहार तेजस्वी यादव बन सकते हैं RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला संभव

तेजस्वी यादव बन सकते हैं RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला संभव

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के लिए 25 जनवरी का दिन बेहद अहम साबित हो सकता है। इस दिन होने वाली बैठक में उन्हें पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

Tejashwi Yadav- India TV Hindi Image Source : TEJASHWI YADAV/X तेजस्वी यादव

पटना: आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। तेजस्वी यादव को RJD का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। 25 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये फैसला लिया जा सकता है। 

क्या है पूरा मामला?

RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को पटना के होटल मौर्या मे 11.30 बजे होने जा रही है। इस बैठक में पार्टी एक बड़ा फैसला ले सकती है। तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस फैसले पर अंतिम मुहर RJD सुप्रीमो और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा लगाई जाएगी।

पार्टी के भीतर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि तेजस्वी यादव भविष्य की राजनीति को देखते हुए पार्टी की पूरी कमान अपने हाथों में लेना चाहते हैं।

हालही में तेजस्वी यादव की सुरक्षा में हुई थी कटौती

बता दें कि हालही में तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कटौती हुई थी। बिहार के बड़े नेताओं की सुरक्षा कैटेगरी में यह बदलाव केंद्र और राज्य सरकार की सुरक्षा समीक्षा के बाद हुआ था। हालांकि सरकार के इस कदम की विपक्ष ने आलोचना की थी और कहा था कि ये राजनीतिक रूप से प्रेरित है। वहीं सरकार का कहना था कि खतरे के आंकलन के आधार पर यह फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद उन्हें सदन में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। बिहार चुनाव में एनडीए को भारी जीत मिली थी और महागठबंधन हार गया था। बिहार चुनाव के बाद लालू परिवार में फूट भी पड़ी थी और लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट करके अपने भाई तेजस्वी पर जमकर निशाना साधा था। 

बता दें कि तेज प्रताप यादव को चुनाव से पहले ही लालू यादव ने आरजेडी से बाहर निकाल दिया था, जिसके बाद तेज प्रताप ने अपनी नई पार्टी बनाकर बिहार चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में तेज प्रताप को हार का मुंह देखना पड़ा था।