छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के इस फैसले पर बिफरीं रेखा शर्मा, दिया ये बयान
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ सहमति के बिना किसी भी प्रकार के यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के दायरे में नहीं आता।
हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा एक अहम निर्णय लिया गया, जिसके अनुसार पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ सहमति के बिना किसी भी प्रकार के यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के दायरे में नहीं आता। इस फैसले ने देशभर में बहस छेड़ दी है और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।
फैसले को बताया बेतुका
रेखा शर्मा ने इस फैसले को "बेतुका और पूरी तरह से अस्वीकार्य" करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस पर ध्यान देने की अपील की। शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "बेतुका और पूरी तरह से अस्वीकार्य। सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले पर हाई कोर्ट को फटकार लगानी चाहिए।" इसके अलावा, उन्होंने निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों से लैंगिक मामलों के प्रति अधिक संवेदनशील होने का आग्रह भी किया।
क्या है हाई कोर्ट का फैसला?
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अगर पत्नी की सहमति के बिना पति द्वारा यौन संबंध बनाए जाते हैं, तो यह दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने आरोपी पति को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (हत्या), 376 (दुष्कर्म) और 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) के तहत लगाए गए आरोपों से बरी करते हुए उसे तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया।
इस फैसले के बाद कई महिला अधिकार संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रमुख मानवाधिकार वकील करुणा नंदी ने इस मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनों के कारण, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के पास इस मामले में कोई और विकल्प नहीं था। उनका कहना था कि कानून में आवश्यक बदलाव की जरूरत है, ताकि ऐसे मामलों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके। (भाषा इनपुट)
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