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ISRO की बढ़ गई टेंशन! NVS-02 सैटेलाइट ऑर्बिट में स्थापित नहीं हो सका; ‘थ्रस्टर्स’ हुए फेल

इसरो ने हाल ही में अपना 100वां मिशन लॉन्च किया था, लेकिन इस मिशन में अब इसरो को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसरो को NVS-02 सैटेलाइट को मनचाहे ऑर्बिट में स्थापित करने के अपने मिशन में थ्रस्टर फेल होने की वजह से झटका लगा है।

NVS-02 satellite- India TV Hindi
Image Source : ISRO इसरो ने बुधवार को सैटेलाइट लॉन्च किया था, यह 2025 का पहला मिशन था।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा NVS-02 सैटेलाइट को मनचाहे ऑर्बिट में स्थापित करने के प्रयासों को उस समय झटका लगा जब अंतरिक्ष यान में लगे ‘थ्रस्टर्स’ काम नहीं कर सके। अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार को यह जानकारी दी। भारत की अपनी अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले एनवीएस-02 सैटेलाइट को 29 जनवरी को GSLV-Mk 2 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। ये श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इसरो का 100वां लॉन्च था।

इसरो ने अपनी वेबसाइट पर दिया अपडेट

इसरो ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि अंतरिक्ष यान में लगे ‘थ्रस्टर्स’ के काम नहीं करने के कारण एनवीएस-02 सैटेलाइट को वांछित ऑर्बिट में स्थापित करने का प्रयास सफल नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि इसरो के वैज्ञानिक इस सैटेलाइट का कोई दूसरा इस्तेमाल खोजने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इसे किसी न किसी तरह से जानकारी हासिल करने में उपयोग किया जा सके, क्योंकि अभी तक की जानकारी के अनुसार, जिस काम के लिए इसको भेजा था अब वो हो पाना मुमकिन नहीं है। इसरो के मुताबिक सैटेलाइट सुरक्षित है और वर्तमान में एक अंडाकार कक्षा में चक्कर लगा रहा है।

साल का पहला मिशन था

बुधवार सुबह 6:23 बजे इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट के जरिए एनवीएस-02 को कामयाबी के साथ लॉन्च किया था। यह मिशन इसरो के नए अध्यक्ष वी नारायणन के लिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि उनके नेतृत्व में यह पहली लॉन्चिंग थी। यह इसरो का इस साल का पहला प्रमुख मिशन भी है। हालांकि अब तकनीकी खराबी की वजह से इस मिशन में अब इसरो को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

2250 किलो वजन, पावर हैंडलिंग क्षमता 3 किलोवाट

2250 किलो वजन और पावर हैंडलिंग क्षमता 3 किलोवाट NVS-02 इसी NVS सीरीज का दूसरा सैटेलाइट है। इसका वजन 2250 किलो है और पावर हैंडलिंग क्षमता 3 किलोवाट है। NVS-02 सही और सटीक समय का अनुमान लगा सके, इसके लिए इसमें स्वदेशी और आयात की गई रुबिडियम एटॉमिक घड़ियों को लगाया गया है। इसका जीवनकाल लगभग 12 साल है।

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