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Hindi News मनोरंजन बॉलीवुड घरों में झाडू-पोछा करती थी मां, बेटा बना TV का 'महाबली हनुमान', अब किस्मत ने ली ऐसी करवट, ऑस्कर पहुंची फिल्म तो गर्व से चौड़ी हुई छाती

घरों में झाडू-पोछा करती थी मां, बेटा बना TV का 'महाबली हनुमान', अब किस्मत ने ली ऐसी करवट, ऑस्कर पहुंची फिल्म तो गर्व से चौड़ी हुई छाती

ऑस्कर में 'होमबाउंड' भारत का नेतृत्व कर रही है। फिल्म की स्टारकास्ट की भी काफी सराहना हो रही है, खास तौर पर लीड एक्टर की जिसने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट करियर की शुरुआत की थी। अब ये इंडस्ट्री के सबसे शानदार एक्टर्स में गिना जा रहा है।

vishal jethwa- India TV Hindi Image Source : IMDB विशाल जेठवा।

बॉलीवुड की दुनिया में बहुत कम कलाकार ऐसे होते हैं, जो बिना किसी गॉडफादर और सिफारिश के अपने टैलेंट के दम पर लंबा और यादगार सफर तय करते हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव और दिवंगत इरफान खान जैसे कलाकारों ने जिस तरह संघर्ष के रास्ते से निकलकर अपनी अलग पहचान बनाई, उसी कतार में आज विशाल जेठवा का नाम भी मजबूती से लिया जाने लगा है। हाल ही में करण जौहर के प्रोडक्शन और नीरज घायवान के निर्देशन में बनी फिल्म 'होमबाउंड' में विशाल की दमदार अदाकारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे इस दौर के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में से एक हैं। फिल्म के ऑस्कर की दौड़ में शामिल होते ही विशाल के अभिनय और उनकी निजी जिंदगी के संघर्षों पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

विशाल जेठवा ने टीवी से की थी शुरुआत

विशाल जेठवा का बचपन आसान नहीं रहा। सीमित साधनों और कठिन हालातों के बीच पले-बढ़े विशाल ने कभी हार नहीं मानी और सिर्फ अपनी मेहनत व हुनर को ही अपनी ताकत बनाया। उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट रखा और बहुत कम उम्र में ही टीवी इंडस्ट्री में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी। बच्चों के किरदारों में भी उनकी परफॉर्मेंस इतनी गहरी होती थी कि दर्शकों को साफ दिखने लगा था कि यह बच्चा आगे चलकर कुछ बड़ा करने वाला है। चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में विशाल को सबसे ज्यादा पहचान डिज्नी चैनल के लोकप्रिय शो 'लक्की' से मिली। इसके बाद उन्होंने 'अदालत', 'सीआईडी' और 'क्राइम पेट्रोल' जैसे चर्चित शोज में अलग-अलग किरदार निभाए।

इन शो की भी रही चर्चा

खास बात यह रही कि उन्होंने कम उम्र में ही निगेटिव और ग्रे शेड्स वाले रोल्स को इतनी परिपक्वता से निभाया कि मेकर्स और दर्शक दोनों उनकी प्रतिभा के कायल हो गए। उनके एक्सप्रेशंस, बॉडी लैंग्वेज और आंखों की गहराई उन्हें आम बाल कलाकारों से अलग बनाती थी। टीवी पर 'संकटमोचन महाबली हनुमान' में हनुमान जी का किरदार हो या 'पेशवा बाजीराव' में नसीर जंग का रोल विशाल ने हर किरदार में अपनी छाप छोड़ी। 'दिया और बाती हम', 'भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप' और युवा अकबर जैसे किरदारों में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया। विज्ञापनों में काम करने से उन्हें कैमरे के सामने और सहज होने का मौका मिला, जिसने उनके अभिनय की नींव और मजबूत की।

कैसे परिवार से आते हैं विशाल?

विशाल की जिंदगी की सबसे भावुक कहानी उनके परिवार के संघर्ष से जुड़ी है। उनकी मां घर-घर जाकर झाड़ू-पोंछा करती थीं और सुपरमार्केट में सैनिटरी पैड्स बेचा करती थीं, जबकि उनके पिता नारियल पानी बेचते थे। खुद विशाल ने कई इंटरव्यू में इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए कहा कि गरीबी को उन्होंने बहुत करीब से देखा है। कान फिल्म फेस्टिवल जैसे बड़े मंच पर खड़े होकर भी उन्हें अपनी जड़ों पर गर्व रहा। फिल्मी दुनिया में विशाल को सबसे बड़ी पहचान 'मर्दानी 2' से मिली, जहां उन्होंने रानी मुखर्जी के सामने एक खौफनाक विलेन बनकर सबको चौंका दिया। इसके बाद 'सलाम वेंकी', 'आईबी71' और 'टाइगर 3' जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

विशाल जेठवा ने किसे दिया होमबाउंड की सफलता का श्रेय

अब 'होमबाउंड' के साथ विशाल जेठवा का सफर ऑस्कर तक जा पहुंचा है। फिल्म का 98वें अकादमी अवॉर्ड्स के लिए टॉप 15 में शॉर्टलिस्ट होना न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल है। खुद विशाल इसे एक सपने जैसा बताते हैं और अपनी इस सफलता का श्रेय पूरी टीम, करण जौहर और नीरज घायवान को देते हैं। संघर्ष से ऑस्कर तक का यह सफर विशाल जेठवा को आज के दौर की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में शामिल कर देता है।

क्या है विशाल का कहना?

अपनी भावनाएं साझा करते हुए विशाल जेठवा ने कहा, 'यह पल मेरे लिए किसी सपने जैसा है और बहुत ही विनम्र कर देने वाला है। होमबाउंड का शॉर्टलिस्ट होना और ऑस्कर की ओर आगे बढ़ना ऐसा कुछ है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। दुनिया भर के दर्शकों से फिल्म को जो प्यार और समर्थन मिला है, उसके लिए मैं दिल से आभारी हूं। मैं करण जौहर सर का खास तौर पर धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने इस कहानी और हम कलाकारों पर भरोसा किया। उनके सपने और सहयोग ने होमबाउंड को उड़ान दी। नीरज घायवान सर की संवेदनशीलता, ईमानदारी और साफ सोच ने मुझे ऐसे भावनात्मक पहलुओं को छूने का मौका दिया, जिन्हें मैंने पहले कभी नहीं छुआ था। उनके साथ काम करना मेरे लिए एक बदल देने वाला अनुभव रहा है। मैं ईशान खट्टर का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिनके जुनून और मेहनत ने हर सीन को और बेहतर बनाया। इस सफर में हमने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा। यह सम्मान पूरी टीम का है, जिसने फिल्म में अपना दिल और मेहनत झोंक दी।'

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