खाकी वर्दी वाला IPS अधिकारी, फिल्मों में दिखा चुका है रौब, पुलिसिंग के साथ एक्टिंग की दुनिया में भी चला रहा सिक्का
सरकारी तंत्र का हिस्सा बने रहना और फिल्मों में अभिनय भी करना काफी मुश्किल टास्क है, लेकिन ऐसा करने में एक नामी IPS अधिकारी कामयाब हैं। वो अपनी सरकारी नौकरी के साथ अपने पैशन को भी जी रहे हैं। जानें इनके बारे में।

IPS अधिकारी बनना आसान नहीं होता और एक बार इस मुकाम तक पहुंचने के बाद फिल्मी दुनिया में पैठ जमाना तो हरगिज आसान नहीं है। ऐसा कर दिखाया एक IPS अधिकारी ने, जो अब एक्टिंग के साथ पुलिसिंग भी शानदार अंदाज में कर रहे हैं। ये कोई और नहीं बल्कि IPS शशि मोहन सिंह हैं। IPS शशि मोहन सिंह की जीवन यात्रा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जुनून और पेशा एक-दूसरे के विरोधी नहीं होते, बल्कि अगर सही संतुलन बनाया जाए तो दोनों एक-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि एक बार किसी पेशे को चुन लेने के बाद सपनों को पीछे छोड़ देना पड़ता है।
बचपन से थी हीरो बनने की चाहत
IPS अधिकारी बनने से पहले शशि मोहन सिंह बिहार के एक साधारण गांव में रहने वाला एक ऐसा बच्चा था, जिसे मंच और अभिनय से बेइंतहा लगाव था। यह लगाव पहली बार तब सामने आया जब वह कक्षा पांच में था और उसने स्कूल के एक नाटक में हिस्सा लिया। मंच पर बोला गया एक छोटा-सा संवाद उसके भीतर कुछ ऐसा जगा गया, जो आगे चलकर जीवनभर का जुनून बन गया। जिस माहौल में वह बड़ा हुआ, वहां थिएटर और लोक कला की समृद्ध परंपरा थी। इसी वजह से वह कम उम्र में ही मंच से जुड़ गया और नियमित रूप से नाटकों में अभिनय करने लगा। तालियों की गूंज और दर्शकों की सराहना ने उसके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
थिएटर्स का रहे हिस्सा
समय के साथ अभिनय के प्रति उसका प्यार और गहराता चला गया। उसने कई थिएटर ग्रुप्स के साथ काम किया, कविताएं लिखीं और स्टेज को अपनी पहचान बना लिया। लेकिन एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के कारण उसके सामने जिंदगी की व्यावहारिक सच्चाइयां भी थीं। आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा उसके लिए जरूरी थीं। इसी वजह से उसने पढ़ाई को प्राथमिकता देने का फैसला किया। कड़ी मेहनत के बाद उसने MPPSC की परीक्षा पास की और साल 2012 बैच के IPS अधिकारी बने, जिन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला। हालांकि वर्दी पहन लेने के बाद भी उनके भीतर का कलाकार कभी खत्म नहीं हुआ।
पुलिस सेवा के बाद किया फिल्मों का रुख
पुलिस सेवा में कई साल बिताने के बाद एक बार फिर किस्मत ने उसे उसके जुनून की ओर मोड़ दिया। दोस्तों ने उसे एक छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘माया’ में अभिनय करने का सुझाव दिया। यह फिल्म न सिर्फ हिट हुई, बल्कि दर्शकों ने शशि मोहन सिंह के अभिनय को भी दिल से सराहा। लोगों ने महसूस किया कि वह सिर्फ एक IPS अधिकारी नहीं है जो कैमरे के सामने खड़ा है, बल्कि एक सच्चा कलाकार है। इसके बाद उसे और भी फिल्मों के ऑफर मिले, जिनमें छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी सिनेमा के प्रोजेक्ट्स शामिल थे। अपने अभिनय के जुनून को गंभीरता से आगे बढ़ाने के लिए उसने दो साल की एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव भी ली।
लोगों के सुनने पड़े ताने
हालांकि उनकी यह राह आसान नहीं थी। शोहरत के साथ-साथ आलोचना भी आई। कई लोगों ने एक IPS अधिकारी के फिल्मों में काम करने के फैसले का मजाक उड़ाया और सवाल उठाए। लेकिन शशि मोहन सिंह अपने निर्णय पर अडिग रहे। समय के साथ वही आलोचक उसके प्रशंसक बन गए, जब उन्होंने उसके काम की गुणवत्ता और उद्देश्य को समझा। सेवा में लौटने के बाद शशि मोहन सिंह ने अपने दोनों संसारों पुलिसिंग और कला को जोड़ने का अनोखा तरीका खोजा। आज SP जशपुर के रूप में वह थिएटर और फिल्मों का इस्तेमाल सामाजिक जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं। ड्रग्स के दुरुपयोग, साइबर क्राइम, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार जैसे मुद्दों पर आधारित उनकी शॉर्ट फिल्में और स्टेज प्ले न सिर्फ लोगों तक संदेश पहुंचा रही हैं, बल्कि कई पुरस्कार भी जीत चुकी हैं।
नहीं डगमगाया मन
उनका संदेश बेहद स्पष्ट और प्रेरक है, 'मैंने कभी जुनून और कर्तव्य में से किसी एक को नहीं चुना। मैंने दोनों को चुना और उन्हें संतुलन के साथ जिया।' IPS शशि मोहन सिंह की कहानी एक ऐसे अधिकारी की कहानी है जिसने अपने बचपन के सपने को जिंदा रखा और उसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम बना दिया।
इन फिल्मों में कर चुके हैं काम
बता दें, उनकी छत्तीसगढ़ी फिल्में मया देदे मयारु, माटी के लाल, सलाम छत्तीसगढ़, बैरी के मया है। फिल्में मया देदे मयारु में उन्होंने छतीसगढ़ी सुपर स्टार व वर्तमान धरसींवा विधायक अनुज शर्मा के साथ काम किया है। शशिमोहन ने भोजपुरी फिल्में भी की है। वर्दी वाला गुंडा फिल्म में उन्होंने भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार दिनेश यादव उर्फ निरहुआ के साथ काम किया है।
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