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Hindi News मनोरंजन बॉलीवुड राहत इंदौरी की कलम से फूटे वो 5 प्यार भरे गाने, जिन्होंने युवाओं को सिखाई मोहब्बत की कला, आज भी तबीयत कर देते हैं तर

राहत इंदौरी की कलम से फूटे वो 5 प्यार भरे गाने, जिन्होंने युवाओं को सिखाई मोहब्बत की कला, आज भी तबीयत कर देते हैं तर

सांझ और ख्वाब का शायर कहे जाने वाले राहत इंदौरी की कलम से मोहब्बत की भी बरसात हुई है। उन्होंने बॉलीवुड को शब्दों में पिरोकर ऐसा प्यार दिया जिससे युवाओं ने मोहब्बत की परिभाषा सीखी।

Rahat Indori- India TV Hindi Image Source : IMAGE SOURCE-X@RAHATINDORI राहत इंदौरी

बहुत गुरूर है दरिया को... अपने होने पर, जो मेरी प्यास से उलझें तो धज्जियां उड़ जाएं... ये लाइनें लिखने वाले एक महान शायर राहत इंदौरी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी युवा पीढी पोषित करते हैं। दिमाग से जहीन और दिल से संवेदनशील शायर राहत इंदौरी को लोग उनके बागी तेवर के लिए पहचानते हैं। उनके एक शेर के ये लाइनें 'बादशाहों से भी फेंके हुए सिक्के ना लिए, हमने खैरात भी मांगी है तो खुद्दारी से' इस बात की तस्दीक करती हैं। सांझ और ख्वाब का वो शायर केवल तेवर का ही नहीं प्यार का भी मुरीद था और उनकी कलम से ऐसे कई गाने भी फूटे जो युवा पीढ़ी को मोहब्बत की कला सिखाते रहे। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में दर्जनों गाने लिखे और कई ऐसे भी रहे जो समय के फेर से भी ऊपर चले गए। आज इस खास खबर में हम जानते हैं राहत इंदौरी की कलम से फूटे वो 5 गाने जिन्हें सुनकर आज भी तबीयत तर हो जाती है। 

1-तुमसा कोई प्यार कोई मासूम नहीं है

 साल 1994 में रिलीज हुई फिल्म 'खुद्दार' में गोबिंदा और करिश्मा कपूर की जोड़ी जमी थी और फिल्म हिट रही थी। फिल्म को इकबाल दुर्रानी ने डायरेक्ट किया था और इसने 8.5 करोड़ रुपयों की कमाई की थी। इस फिल्म का एक गाना जो मोहब्बत का पर्याय बना और उस दौर में युवाओं को इश्क का पाठ पढ़ा गया था। इस गाने के बोल थे 'तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है' और इसके बोल लिखे थे कलम के जादूगर राहत इंदौरी ने। गाने में एक अंतरा आता है 'सौ फूल खिले जब ये खिला रूप सुनहरा, सौ चांद बने जब ये बना चांद सा चेहरा' ऐसे रूपक और अलंकार से खूबसूरती को कहने वाले इस ख्वाब के शायर ने युवाओं को प्यार की परिभाषा सिखाई थी। एक और अंतरा 'ये होठ ये पलकें ये निगाहें ये अदाएं, मिल जाए खुदा मुझको तो मैं ले लूं बलाएं' जिसमें शायर ने प्रेमिका की खूबसूरती की तारीफ उसे बनाने के लिए खुदा का शुक्रिया करने की गहरी चाहत को ऐसे उतारा जिसने समय के फेर को बदल दिया है। 31 साल बाद भी जब ये गाना कानों में पड़ता है तो शहद की तरह घुलता है। 

2-कोई जाए तो ले आए 

साल 1994 में आई डायरेक्टर राजकुमार संतोषी की फिल्म 'घातक' न केवल सुपरहिट रही बल्कि सनी देओल के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में शुमार हो गई। इसमें डेनी के किरदार कात्या को आज भी लोग भूले नहीं हैं और सनी देओल के किरदार काशी सबसे चहेते किरदारों में से एक है। इस फिल्म का एक गाना था जिसके बोल थे 'कोई जाए तो ले आए, दिल दिल दिल... मेरी लाख दुआएं पाए', जिसमें ममता कुलकर्णी ने डांस किया था और इस गाने को गणेश आचार्य ने कोरियोग्राफ किया था। इस गाने के बोल भी राहत इंदौरी ने लिखे थे जिसमें उन्होंने उस दिल की पुकार को संगीत में शब्दों को पिरो दिया था जिसमें एक लड़की को प्यार हो गया और अब उसे इस प्यार पर पछतावा है। ये मीठा दर्द केवल राहत इंदौरी ही इतनी बारीकी से समझ सकते हैं। इस गाने में अंतरा है, 'दिल मेरा पहेली है, सोने की हवेली है' और 'दिल साथ नहीं जब से पागल ये जवानी है' जो आपको प्यार और उसकी मीठी तकरार की दुनिया की सैर कराते हैं। 

3-देखो देखो जानम हम

साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म 'इश्क' को इंदर कुमार ने डायरेक्ट किया था और इसमें अजय देवगन के साथ आमिर खान ने लीड रोल निभाया था। 45 करोड़ रुपयों की कमाई के साथ ये फिल्म सुपरहिट रही थी और जूही चावला के साथ काजोल फिल्म की हीरोइन रही थीं। इस कॉमेडी फिल्म को लोगों ने खूब प्यार दिया था और इसके इश्क की चर्चा भी खूब चली थी। इस फिल्म का एक गाना था 'देखो देखो जानम हम' जिसे अनु मलिक ने कंपोज किया था और इसके बोल राहत इंदौरी ने लिखे थे। ये गाना आज भी दिलों में बसा हुआ है और 29 साल बाद भी लोग भूले नहीं हैं। इस गाने में एक अंतरा है 'शीशे ने शीशे से टकराकर कुछ कह दिया, हैं पल मुरादों के ये पल हैं यादों के, अब मेरी जान रहे या चली जाए' जिसमें राहत इंदौरी प्यार की परिभाषा गढ़ते हैं और युवाओ के दिलों के भाव को संगीत में पिरो देते हैं। इस गाने को उदित नारायण और अल्का याग्निक ने गाया था। 

4-चोरी-चोरी जब नजरें मिलीं
साल 1998 में आई फिल्म 'करीब' को डायरेक्टर विद्यु विनोद चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था और इसमें बॉबी देओल के साथ शबाना रजा हीरोइन रही थी। फिल्म का एक गाना 'चोरी चोरी नजरें मिलीं' आज भी बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन गानों में गिना जाता है। इस गाने को अनु मलिक ने कंपोज किया था और इसमें राहत इंदौरी ने शब्दों का जादू फूंका था। 28 साल बाद भी ये गाना लोगों के कानों में शहद घोलता है। राहत इंदौरी इस गाने में लिखते हैं, 'फूलों के ख्वाबों में आकर, खुशबू चुरा ले गई, बादल का आंचल भी आकर, पागल हवा ले गई, एक फूल ने एक फूल से फिर कान में कुछ कहा, रिश्तों के नीले भंवर कुछ और गहरे हुए। तेरे मेरे साए है पानी पे ठहरे हुए, जब प्यार का मोती गिरा, बनने लगा दायरा।' संगीत में शब्दों का जादू ऐसे केवल कोई कोई सांझ और ख्वाब का शायर की पिरो सकता है। इस गाने को कुमार सानू और संजीवनी ने गाया था। 

5-बुंबरो बुंबरो श्याम रंग बुंबरो
साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म 'मिशन कश्मीर' का गाना 'बुंबरो बुंबरो श्याम रंग बुंबरो' 26 साल बाद भी बिल्कुल नया और ताजा लगता है। कानों में ठंडक पहुंचाने वाला ये गाना शंकर एहसान लॉय ने कंपोज किया था। इसे गाया था शंकर महादेवन, जसपिंदर नरुला और सुनिधि चौहान ने। लेकिन इसके बोल लिखे हैं राहत इंदौरी ने। बुंबरो का मतलब होता है भंवरा... जिसमें दिलरुबा पूछ रही है कि श्याम यानी सांवले रंग के भंवरे तुम किस बगिया से आए हो? राहत इदौरी लिखते हैं, 'चंदा की पालकी में दिल की मुराद लाई, जन्नत का नूर लेके मंहदी की रात आई। रूप पर सहेलियों के ख्वाबों की रोशनी है, सबने दुआएं मांगी रब ने कबूल की है।' इन शब्दों को सुनकर युवाओं ने अपने प्यार की परिभाषाएं समझीं और अपनी प्रेमिकाओं को इसी नजर से महसूस किया। वर्तमान दौर के सुपरहिट रैपर्स की समझ से परे ये गाने आज भी दिलों में बसे हुए हैं। 

 

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