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Hindi News Explainers Explainer: घर के खर्चों से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक, डॉलर के मुकाबले धराशायी हुए रुपये से भारत की आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?

Explainer: घर के खर्चों से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक, डॉलर के मुकाबले धराशायी हुए रुपये से भारत की आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?

भारत में बुधवार का दिन आर्थिक इतिहास में दर्ज हो गया क्योंकि पहली बार भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के नीचे फिसल गया। मंगलवार के 89.94 से गिरकर रुपया 90.14 पर पहुंच गया। गिरावट मामूली लग सकती है, लेकिन इसका असर गहरा है।

आम जनता का कैसे...- India TV Hindi Image Source : ANI आम जनता का कैसे बिगड़ेगा बजट

भारतीय रुपया इतिहास में पहली बार 90 रुपये प्रति डॉलर के नीचे फिसल गया है। बुधवार को खुले बाजार में रुपया 90.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और इस गिरावट ने न सिर्फ आर्थिक जगत को चौंकाया, बल्कि आम भारतीय परिवारों की चिंता भी बढ़ा दी है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि आने वाले महीनों में आपकी जेब, आपके खर्च और आपकी लाइफस्टाइल पर बड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन आखिर ये गिरावट क्यों हुई? क्या असर होगा? और क्या भारतीय परिवार अभी से तैयारियां शुरू कर दें? आइए विस्तार से समझते हैं।

रुपये की रिकॉर्ड गिरावट

रुपये की कमजोरी कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारणों का नतीजा है:

  1. भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी: हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही। अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर 50% तक शुल्क बढ़ा दिया, जिससे कारोबारियों और निवेशकों में चिंता बढ़ी। इसका सीधा असर रुपये की मांग पर पड़ा।
  2. विदेशी निवेशकों का पलायन: 2025 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 17 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इतनी बड़ी बिकवाली ने रुपये पर भारी दबाव बनाया।
  3. RBI का नया रुख: IMF ने भारत की एक्सचेंज रेट पॉलिसी को थोड़ा बदला है। इसका मतलब है कि RBI अब रुपये को मजबूती से थामने के बजाय धीरे-धीरे बाजार के हिसाब से गिरने दे रहा है ताकि लंबी अवधि में स्थिरता बनी रहे।

रुपये की गिरावट

1. रसोई से पेट्रोल तक महंगाई का साया

रुपये की कमजोरी का असर सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं है। आपकी रसोई, आपकी जेब, आपकी विदेश यात्रा, आपका EMI सब पर इसका दबाव महसूस होगा। भारत 90% कच्चा तेल आयात करता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो तेल महंगा पड़ता है। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, LPG सिलेंडर महंगा होगा और कुकिंग ऑयल, घी, पैकेज्ड फूड की कीमतें बढ़ेंगी रुपये की कमजोरी सीधे तौर पर आयातित महंगाई को बढ़ावा देती है, जो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करेगी।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स होंगे महंगे

लैपटॉप, फ्रिज, टीवी, स्मार्टफोन… इनमें से ज्यादातर वस्तुएं या तो आयात होती हैं या इनके पुर्जे विदेश से आते हैं। अगला iPhone या Samsung फोन, नई वॉशिंग मशीन होम रेनोवेशन के इलेक्ट्रॉनिक आइटम की कीमतें बढ़ेंगी।

3. विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ा झटका

विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों पर रुपया गिरने का सबसे बड़ा बोझ पड़ता है। इसके अलावा रेंट, खाने का खर्च, कम्यूटिंग कॉस्ट सब बढ़ रहे हैं। यूएस, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले छात्रों के माता-पिता की EMI में भी 12-13% तक बढ़ोतरी होगी।

4. विदेश यात्रा और इंटरनेशनल हॉलिडे अब और महंगी

एक औसत भारतीय परिवार अगर 3 लोगों के साथ विदेश यात्रा करता है और 2000 डॉलर खर्च करता है। पहले यह 1.6 लाख रुपये पड़ता था, लेकिन अब लगभग 1.8 लाख रुपये पड़ रहा है यानी सीधा 20,000 रुपये का ज्यादा बोझ पड़ेगा।

5. छोटे व्यापारियों और MSMEs पर दोहरी मार

जिन व्यापारियों का काम आयातित कच्चे माल पर निर्भर है, उनकी लागत अचानक बढ़ गई है। साथ ही विदेश यात्रा, मीटिंग्स, बिजनेस प्रोसेसिंग का खर्च बढ़ रहा है। छोटे व्यापारी पहले ही मार्जिन की लड़ाई लड़ रहे थे, अब बढ़ी लागत से उनकी कमाई और प्रभावित होगी।