Hindi News गैलरी इवेंट्स तस्वीरों में देखिए मथुरा में कैसे खेली जाती है लट्ठमार होली Published : Mar 19, 2016 04:37 pm IST, Updated : Mar 19, 2016 04:37 pm IST 1/10 भगवान कृष्ण की साथी राधा के जन्म स्थान बरसाना की लट्ठमार होली भारत के सबसे रंगीन पर्व होली मनाने के अपने अनूठे तरीके के लिए विश्वप्रसिद्ध है| 2/10 बरसाने की लट्ठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। 3/10 बरसाना की लठामार होली भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं की पुनरावृत्ति जैसी है। 4/10 माना जाता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ इसी प्रकार कमर में फेंटा लगाए राधारानी तथा उनकी सखियों से होली खेलने पहुंच जाते थे। 5/10 राधारानी तथा उनकी सखियां ग्वाल वालों पर डंडे बरसाया करती थीं। 6/10 ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी लाठी या ढ़ालों का प्रयोग किया करते थे जो धीरे-धीरे होली की परंपरा बन गया। 7/10 आज भी इस परंपरा का निर्वहन उसी रूप में किया जाता है। 8/10 यहां के गुलाल और रंग की खाशियत यह है कि ये कपड़े और बदन पर नहीं चढ़ते हैं। इनसे शरीर को भी किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। 9/10 कीर्तन मंडलियों के साथ यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में भांग और ठंडई बांटी जाती है। 10/10 श्रीजी मंदिर में राधारानी को टेसू के फूलों का भोग लगाया गया। Subscribe to Notifications