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गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव: भाजपा का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, 700 से अधिक सीटों पर निर्विरोध जीती

गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए 700 से अधिक सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की है, जो 2021 (220 सीटें) की तुलना में बहुत अधिक है।

गुजरात नगर निकाय चुनाव में भाजपा की बंपर जीत- India TV Hindi
Image Source : FILE गुजरात नगर निकाय चुनाव में भाजपा की बंपर जीत

गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है और बड़ी जीत हासिल कर ली है। कई सीटों पर हुए विवाद के बीच भाजपा ने 700 से अधिक सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की है, जो 2021 के चुनाव में मिली 220 सीटों की तुलना में बहुत अधिक है। विपक्षी पार्टी  कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीजेपी और पुलिस पर उम्मीदवारों को डराने-धमकाने और फॉर्म वापस लेने के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए हैं, जिसके कारण उन्हें अपने उम्मीदवार अज्ञात स्थानों पर छिपाने पड़े। 

यहां गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों के प्रमुख अपडेट दिए गए हैं:

बीजेपी की निर्विरोध जीत: गुजरात के उपमुख्यमंत्री ने बताया कि 300 से अधिक सीटों पर निर्विरोध जीत के साथ कुल निर्विरोध सीटों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है, जिसमें कड़ी, ऊंझा और गनदेवी जैसी नगरपालिकाएं शामिल हैं।

विपक्ष के आरोप और कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें धमकाने के आरोप हैं। कांग्रेस नेता अमित चावडा ने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस कांग्रेस उम्मीदवारों के घरों पर जाकर उन्हें फॉर्म वापस लेने के लिए धमका रही है।

प्रलोभन और खरीद-फरोख्त:

अहमदाबाद के रामोल वार्ड की उम्मीदवार बीनाबेन मोदी ने आरोप लगाया कि उन्हें फॉर्म वापस लेने के लिए 25 लाख रुपये का लालच दिया गया।

उम्मीदवारों का "गुम" होना: कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को दलबदल और दबाव से बचाने के लिए "मिशन अननोन" शुरू किया है, जिसके तहत 65 से अधिक उम्मीदवारों को गुप्त या सुरक्षित स्थानों (जैसे रिसॉर्ट) पर भेजा गया है। 

भाजपा की सफाई और अन्य पार्टियों की स्थिति

भाजपा का पक्ष: भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनकी कमजोरी और जनता के बीच घटते आधार का परिणाम बताया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के अनुसार, कई विपक्षी उम्मीदवारों ने विकास कार्यों से प्रभावित होकर स्वेच्छा से नाम वापस लिए हैं。

AIMIM और AAP:

आम आदमी पार्टी (AAP) को कई शहरी निकायों में मजबूत उम्मीदवार खोजने में कठिनाई का सामना करना पड़ा है। वहीं, सूरत जैसे क्षेत्रों में AAP उम्मीदवारों को भी दबाव के डर से सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित किया गया है।

AIMIM की मुसीबत:

रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIMIM के लिए, उम्मीदवारों को मैदान में उतारने और उन्हें दबाव में वापस फॉर्म खींचने से रोकने में मुश्किलें आ रही हैं।

कुल उम्मीदवार (BJP vs Congress): चुनाव 393 स्थानीय निकायों में हो रहे हैं, जिसमें 1,572 उम्मीदवारों ने फॉर्म वापस लिए हैं। प्रमुख मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है, जिसमें भाजपा का पलड़ा भारी है।

झड़प और हंगामे: वडोदरा, सूरत, मेहसाणा और बनासकांठा में फॉर्म वापस लेने के दौरान, विशेषकर नाम वापसी के आखिरी दिन, भारी हंगामे और पुलिस तैनाती की खबरें आई हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस बीजेपी के दबाव में काम कर रही है। नामांकन वापसी के दौरान कई जगहों पर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और झड़पें हुईं हैं।