गांधीनगर: गुजरात सरकार ने बुधवार को 'गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026' विधेयक विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य जिसका उद्देश्य धर्म, जाति या पंथ की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन संबंध से संबंधित कानूनों को रेग्यूलेट करना है। अन्य बातों के अलावा, इसमें सहजीवन संबंध (लिव-इन रिलेशनशिप) के रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ औपचारिक घोषणा के माध्यम से उन्हें समाप्त करने का प्रावधान भी है।
डिप्टी सीएम ने विधानसभा में पेश किया विधेयक
राज्य के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया। राज्य द्वारा नियुक्त समिति ने एक दिन पहले ही राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन पर अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपी थी। कृषि मंत्री और सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघानी ने कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया, ''UCC विधेयक विधानसभा में पेश कर दिया गया है। सदन में इस पर आगे चर्चा होगी। सभी अपने विचार साझा कर सकते हैं। UCC विधेयक एक बहुत महत्वपूर्ण कानून है। हमारी सरकार यह विधेयक इसलिए लायी है ताकि हर नागरिक को समान अधिकार मिल सकें।''
विधानसभा की वेबसाइट पर दस्तावेज प्रकाशित
विधानसभा सचिव सी बी पांड्या ने बताया कि विधेयक का दस्तावेज बुधवार को विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित हो गया, हालांकि इस पर चर्चा और पारित होने के लिए 24 मार्च को विचार किया जाएगा, जो मौजूदा बजट सत्र की समाप्ति से एक दिन पहले है। उम्मीद है कि इस विधेयक पर बजट सत्र के अंतिम दिन यानी 25 मार्च को चर्चा और अनुमोदन के लिए विचार किया जाएगा।
पूरे राज्य में लागू होगा कानून
'गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026' नामक प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले निवासी भी इसके दायरे में होंगे। हालांकि, विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए गए विधेयक के दस्तावेज में कहा गया है कि यह अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं।
विधेयक में क्या खास है?
इसमें कहा गया है, ''वर्तमान विधेयक धर्म, जाति, पंथ या लैंगिक भेदभाव के बिना राज्य के सभी नागरिकों के लिए नागरिक मामलों को नियंत्रित करने वाला एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करके इन सिफारिशों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को कायम रखना है, जिससे समाज की एकता एवं अखंडता मजबूत हो सके।'' इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में वैध विवाह के लिए शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनमें द्विविवाह पर प्रतिबंध, पुरुषों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित करना शामिल है।