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Hindi News हेल्थ क्या डिजिटल डिटॉक्स आत्महत्या के विचारों को कर सकती है दूर? एक्सपर्ट से जानें मेंटल हेल्थ पर पड़ता है कैसा प्रभाव?

क्या डिजिटल डिटॉक्स आत्महत्या के विचारों को कर सकती है दूर? एक्सपर्ट से जानें मेंटल हेल्थ पर पड़ता है कैसा प्रभाव?

डिजिटल डिटॉक्स, मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। एक्सपर्ट से जानते हैं मेंटल हेल्थ को सुधारने में यह कितना प्रभावकारी है?

डिजिटल डिटॉक्स- India TV Hindi Image Source : FREEPIK डिजिटल डिटॉक्स

आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और काफी कुछ हमारे दिलों दिमाग पर कब्जा कर चुके हैं। कई बार हमें एहसास भी नहीं होता है कि यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को कितना ज्यादा खराब करता है। बहुत ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें देखा जाता है कि, जो लोग फोन का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, ऐसे लोगों में चिंता, तनाव, नींद की समस्या, अकेलापन और अवसाद जैसी समस्याओं में वृद्धि होती है और कुछ मामलों में तो यह आत्महत्या के विचारों तक भी पहुंच जाता। ऐसे में डिजिटल डिटॉक्स क्या सच में फायदेमंद साबित होता है। 

नई दिल्ली में स्थित आर्टेमिस अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार एवं प्रमुख मनोचिकित्सा, डॉ. राहुल चंडोक कहते हैं कि डिजिटल डिटॉक्स सीधे तौर पर आत्महत्या के विचारों को कम करने में फायदेमंद नहीं है ,लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में काफी मदद कर सकता है। क्योंकि तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल तनाव चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ाता है और डिजिटल डिटॉक्स इन समस्याओं को कम करने में सहायक होता है।

फोन कम चलाने से व्यक्ति असली दुनिया से जुड़ने का समय पाता है, जिससे सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं और अकेलेपन की भावना कम होती है और इससे आत्म सम्मान में भी सुधार होता है। कई बार सोशल मीडिया पर फेमस होने की चाह मन में असुरक्षा और आत्मसंदेह बढ़ती है। गंभीर मानसिक विकार वाले मामले में विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है। डिजिटल डिटॉक्स सिर्फ सहायक उपाय है इलाज का विकल्प नहीं है

डिजिटल डिटॉक्स कैसे सहायक है?

  • स्क्रीन से दूर रहने से मन शांत होता है और नेगेटिव विचारों से राहत मिलती है। इससे तनाव और चिंता में कमी आती है

  • रात में स्क्रीन का इस्तेमाल न करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है

  • समय का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। जीवनशैली संतुलित होती है।

  • फोन से दूर रहने पर आप नेगेटिव कमेंट से दूर रहकर खुद को स्वीकार करना सिखते हैं

कैसे करें डिजिटल डिटॉक्स?

  • रोजाना कुछ समय के लिए फोन सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूरी बनाएं।

  • दिन की शुरुआत और सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग न करें।

  • खाली वक्त में योग ध्यान प्राणायाम जैसे अभ्यास करें।

  • करीबी लोगों से बातचीत करें।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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