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महिलाओं में सबसे ज्यादा होते हैं ये 3 तरह के कैंसर, जानें इनके लक्षण और क्या हैं इस जानलेवा बीमारी से बचने के उपाय

Cancer In Women: कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले कुछ सालों में महिलाओं में कैंसर के मामले काफी ज्यादा सामने आ रहे हैं। महिलाओं को तीन तरह के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है। जानिए इनके लक्षण क्या हैं?

महिलाओं में कैंसर का खतरा - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK महिलाओं में कैंसर का खतरा

घर-परिवार के बारे में सोचते-सोचते कई बार महिलाएं अपने बारे में सोचना भूल जाती है। जिसकी वजह से कई स्वास्थ्य समस्याएं परेशान करने लगती हैं। कई बार तो लापरवाही की वजह से ऐसी बीमारियां लग जाती हैं जिसकी वजह से जान से हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसी ही खतरनाक बीमारी कैंसर है। जिसका खतरा पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। महिलाओं में खासतौर से 3 तरह के कैंसर सबसे ज्यादा होते हैं। जिसमें ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और ओवरी कैंसर शामिल हैं। अगर समय पर इनके लक्षणों को नहीं पहचाना और सही इलाज नहीं करवाया तो ये कैंसर जानलेवा भी हो सकते हैं। कई बार महिलाएं कैंसर के लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। जिससे कैंसर को डिटेक्ट होने में देरी हो सकती है। जानिए महिलाओं में होने वाले ओवेरियन कैंसर के लक्षण क्या हैं और इसे कैसे पहचान सकते हैं? 

आपको बता दें कि भारत में एक लाख में से 4.6 प्रतिशत महिलाएं ओवेरियन कैंसर से जान गंवा देती हैं। डॉक्टर से जानते हैं ओवेरियन कैंसर के लक्षण क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

नोएडा सीएचसी की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ मीरा पाठक ने बताया कि 'भारतीय महिलाओं में डिटेक्ट होने वाले तीन कैंसर होते हैं। पहला है ब्रेस्ट कैंसर, दूसरा है सर्वाइकल कैंसर और तीसरा है ओवरी कैंसर। ओवरी कैंसर में 20 प्रतिशत मामलों में जेनेटिक फैक्टर वजह होती है। जिसमें एक जीन न्यूट्रीशन होता है बीआरसीए-1 और बीआरसीए-2, इसमें म्यूटेशन होने के कारण होता है। बाकी 80 प्रतिशत में कैंसर होने के कारण पता नहीं चल पाते हैं।

ओवेरियन कैंसर के रिस्क फैक्टर्स 

डॉ बताती हैं कि ओवेरियन कैंसर में कई रिस्क फैक्टर्स होते हैं जिनका ध्यान में रखना चाहिए। 

  • पहला है उम्र, जिनकी उम्र 50 साल से ज्यादा है।
  • दूसरा हार्मोनल इंबैलेंस होना (जिन्हें 13 साल से पहले पीरियड्स की शुरुआत हो जाए और 50 साल के बाद भी पीरियड्स होते हों।)
  • तीसरा अगर पहला बच्चा 30 साल की उम्र के बाद हुआ है।
  •  इनफर्टिलिटी की हिस्ट्री।
  • बार बार अबॉर्शन की हिस्ट्री।
  • मोटापा होना भी ओवेरियन कैंसर का खतरा पैदा करता है।

ऐसी महिलाओं में ओवेरियन कैंसर होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं।

ओवेरियन कैंसर के लक्षण

  1. एसिडिटी का एक महीने से ज्यादा समय तक चलना 
  2. कब्ज रहना
  3. पेट को भरा-भरा लगना 
  4. अचानक कोई सूजन दिखने लगना
  5. पेल्विक पैन होना
  6. शरीर के निचले हिस्से में दर्द होना 
  7. बार-बार यूरिन आना
  8. अचानक वजन कम होना
  9. थकान महसूस होना 
  10. चेहरे पर हेयर ग्रोथ होना

अगर आपके शरीर में ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें और वो लंबे समय तक चलें तो आपको जल्द किसी अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

ओवेरियन कैंसर का कैसे पता लगाएं, क्या टेस्ट करवाएं

अगर आपकी फैमिली में कैंसर की हिस्ट्री रही है तो आपको कैंसर का टेस्ट कराना चाहिए। परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर या ओवेरियन कैंसर रहा है तो आपको नियमित जांच करना जरूरी है। आपको 6 से 12 महीने में गायनेकोलॉजिस्ट से जांच करवानी चाहिए। जिसमें अल्ट्रासाउंड, जीन टेस्ट, ब्लड में ट्यूमर र्माकर जैसे टेस्ट किए जाते हैं। ये चेकअप कराने से कैंसर समय से डिटेक्ट होता है जो समय से इलाज करने में मददगार है।

ओवेरियन कैंसर का इलाज और बचाव 

डॉक्टर मीरा की मानें तो ओवेरियन कैंसर की 4 स्टेज होती हैं। स्टेज के हिसाब से सर्जरी और कीमोथेरेपी होती हैं। इस कैंसर से बचने के लिए जो महिला फीडिंग कराती हैं उन्हें खतरा कम होता है। कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स को लेने से भी ओवेरियन कैंसर के चांसेस घटते हैं। लाइफस्टाइल में सकारात्मक बदलाव, हेल्दी डाइट, वजन कम करने से आप ओवेरियन कैंसर से बच सकते हैं।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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