नयी दिल्ली: मलेशिया और भारत ने आज सभी संबंधित देशों से अनुरोध किया कि वे धमकियां दिए बगैर और विभिन्न गतिविधियों के दौरान आत्मनियंत्रण रखते हुए तथा तनाव बढ़ाने वाले किसी भी एकतरफा कदम से बचते हुए दक्षिण चीन सागर के विवाद को सुलझाएं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी संबंधित पक्षों को समुद्री कानूनों पर संयुक्त राष्ट्र की संधि यूनाइटेड नेशन्स कन्वेन्शन ऑन लॉज ऑफ सीज, यूएनसीएलओएस का अक्षरश सम्मान करना चाहिए। इसी संधि के माध्यम से सागर और महासागरों में अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया तय हुई।
विवादित दक्षिण चीन सागर में स्थित स्पार्टली द्वीप पर मालिकाना हक का दावा करने वालों में मलेशिया भी शामिल है। दोनों देशों के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून तथा समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के सिद्धांतों के आधार पर नौवहन की स्वतंत्रता, असैन्य विमानों को उड़ान भरने की स्वतंत्रता और कानूनी रूप से वैध व्यापार करने की अनुमति देने संबंधी अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष आर्थिक समृद्धि बढ़ाने, नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र, विशेष रूप से समुद्री सीमा में स्थिरता बनाए रखने संबंधी अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग का स्वागत किया। दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद तथा एक से ज्यादा देशों मैं होने वाले अपराधों से निपटने में सहयोग संबंधी सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर की बात हुई। दोनों देशों ने कैदियों के स्थानांतरण से जुड़ी संधि को जल्दी अंतिम रूप देने पर भी सहमति जताई। मोदी ने कहा हमारी व्यापक रक्षा भागीदारी हमारे सशस्त्र बलों को पहले ही करीब ले आई है। हम प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, उपकरणों तथा सैन्य हार्डवेयर के रखरखाव, नौवहन सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया में सहयोग कर रहे हैं।
Latest India News