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खुल रही भूकंप-रोधी भवनों की हकीकत

लखनऊ: जीवनभर की कमाई लगाकर ऊंची-ऊंची इमारतों में घरों की बुकिंग कराते समय दावे तो बड़े-बड़े किए गए, लेकिन जब भूकंप के झटके आए तो इमारत के भूकंप-रोधी होनी की हकीकत खुलकर सामने आ गई।

भूकंप-रोधी भवनों के निर्माण के लिए वर्ष 2001 में ही शासनादेश जारी हो चुका है। तत्कालीन विशेष सचिव संजय भूसरेड्डी की ओर से जारी शासनादेश में नगरीय क्षेत्र के तीन से 12 मीटर तक ऊंचाई के सभी इमारतों को भूकंपरोधी बनाना अनिवार्य किया जा चुका है।

भूकंप आदि आपदाओं से निपटने के लिए सरकारी प्रावधानों की कमी नहीं है, मगर उसके क्रियान्वयन में शिथिलता है। जब भी भूकंप, बाढ़ आदि आपदाएं आती हैं तो हम सहम जाते हैं। आपदाओं से ज्यादा सरकारी मशीनरी की खस्ताहाल तैयारियां हमें और डराने लगती हैं।

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