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मटन का पतीला लेकर थाने पहुंच गया व्यक्ति, कहा- '20 बार में नहीं पका', पुलिस ने मिनटों में खत्म कर दी परेशानी

गजब की बात यह हुई कि पुलिस ने इस घटना पर कार्रवाई करते हुए मिनटों के अंदर समस्या सुलझा दी। पुलिस के कारण व्यक्ति खुश होकर घर गया और उसका उगादी फेस्टिवल खराब होने से बच गया।

Mutton complaint- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT मटन लेकर थाने पहुंचा व्यक्ति

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में एक अजीब और मजेदार घटना हुई। ताड़ीपत्री टाउन पुलिस स्टेशन की पुलिस तब हैरान रह गई जब उन्हें एक अजीब शिकायत मिली। एक व्यक्ति मटन से भरे पतीले के साथ पुलिस स्टेशन पहुंच गया और शिकायत की कि कई बार कोशिश करने के बाद भी उसका मटन नहीं पक रहा है।

टाउन सर्कल इंस्पेक्टर आनंद राव तब हैरान रह गए जब वो व्यक्ति बिना पके मीट से भरा बर्तन लेकर स्टेशन पहुंचा। उसने कहा कि बार-बार कोशिश करने के बाद भी वह ठीक से न तो नरम हो रहा है और न ही पक रहा है। मामला अजीब था, लेकिन इसे गंभीरता से लिया गया और आखिरकार पुलिस के दखल से इसे सुलझा लिया गया।

20 बार में नहीं पका मटन

शिकायत करने वाले, सोडाला हाजी, ताडीपत्री के पुतलुरु रोड के रहने वाले हैं। उन्होंने उगादी सेलिब्रेशन के लिए मीट खरीदा था। पारंपरिक सिर के मीट की करी बनाने के लिए उत्साहित होकर, उन्होंने इसे पकाना शुरू किया, लेकिन उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि लगभग 20 कोशिशों के बाद भी मीट कड़ा और कच्चा ही रहा।

थाने पहुंचकर की शिकायत

हताश और कन्फ्यूज होकर, हाजी पूरा खाना पकाने का बर्तन सीधे पुलिस स्टेशन गए और वेंडर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी शुरू में शिकायत की वजह से हैरान थे, लेकिन उन्होंने मामले की जांच करने का फैसला किया।

पुलिस ने मिनटों में सुलझाया मामला

मीट बेचने वाले से बात करने के बाद सर्कल इंस्पेक्टर आनंद राव ने सुनिश्चित किया कि मामला वहीं सुलझा लिया जाए। बेचने वाला खराब मीट को बदलकर उतनी ही मात्रा में ताजा, ठीक से खाने लायक मटन देने के लिए मान गया और मामला सुलझा लिया गया।

हिंदू नववर्ष का प्रमुख त्योहार है उगादी

उगादी हिंदू नववर्ष का प्रमुख त्योहार है। यह मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में मनाया जाता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला यह पर्व आमतौर पर मार्च या अप्रैल में पड़ता है। इस साल यह त्योहार 19 मार्च को मनाया गया। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। इस दिन सुबह-सुबह स्नान कर नए कपड़े पहने जाते हैं। घर के दरवाजे पर रंग-बिरंगे चावल के आटे या फूलों से मुग्गु/रंगोली बनाई जाती है। लोग मंदिर जाकर भगवान ब्रह्मा, विष्णु या परिवार के देवताओं की पूजा करते हैं। अंत में परिवार के साथ मिलकर भोजन किया जाता है। इसी खास खाने के लिए व्यक्ति ने मटन खरीदा था, जो 20 बार में भी नहीं पका।

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