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5,000 किताबें एक रात में हुईं बर्बाद, बेंगलुरु के 'द बुकवर्म' में भारी बारिश से आई बाढ़ ने मचाई तबाही

दुकान में हाल ही में अतिरिक्त स्टॉक लाया गया था। क्षतिग्रस्त किताबों में उस नए स्टॉक का अधिकांश हिस्सा भी शामिल था। काफी क्षतिग्रस्त किताबों को फेंकना पड़ेगा।

बुक स्टोर में घुसा बाढ़ का पानी- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/@THEBOOKWORM_BLR बुक स्टोर में घुसा बाढ़ का पानी

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की एक चर्चित किताबों की दुकान को बुधवार रात को भारी बारिश के कारण आई भीषण बाढ़ में हजारों किताबें खोनी पड़ीं। दुकान का अधिकांश स्टॉक पानी में डूब गया। चर्च स्ट्रीट स्थित 'द बुकवर्म' ने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें दुकान के अंदर बाढ़ के पानी में तैरती किताबें दिखाई दे रही हैं। तस्वीरों में दुकान के बाहर जमीन पर ओले गिरते हुए भी दिख रहे हैं। दुकान ने बताया कि बाढ़ में 4,000 से 5,000 किताबें नष्ट हो गईं।

समय ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया। दुकान के मालिक कृष्णा कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों से पहले दुकान में हाल ही में अतिरिक्त स्टॉक लाया गया था, जो आमतौर पर व्यवसाय के लिए व्यस्त समय होता है। क्षतिग्रस्त किताबों में उस नए स्टॉक का अधिकांश हिस्सा शामिल था।

दुकान मालिक ने क्या बताया?

दुकान के मालिक कृष्णा ने बताया कि दुकान कुछ किताबों को धूप में सुखाकर और कम कीमत पर बेचकर उन्हें बचाने की कोशिश करेगी। हालांकि, काफी संख्या में किताबें इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं कि उन्हें बचाया नहीं जा सकता और उन्हें फेंकना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक प्रकाशन पद्धतियां इस नुकसान को बढ़ाने का कारण हैं, क्योंकि अब अधिकतर पब्लिशर्स रिसाइकिल्ड पेपर का इस्तेमाल करते हैं, जो पानी से बचाव में बहुत कमजोर होता है। विशेष रूप से, ऐस्ट्रिक्स और ओबेलिक्स जैसी चित्रित कॉमिक्स जो तेल आधारित कागज पर छपी होती हैं, वे बिल्कुल भी नहीं बच पाई हैं।

इन तस्वीरों को देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने सहानुभूति जताई और कई फॉलोअर्स ने दुख व्यक्त करते हुए समर्थन दिया। कई लोगों ने पाठकों से दुकान से क्षतिग्रस्त किताबें खरीदकर मदद करने का आग्रह किया। एक टिप्पणीकार ने कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट पर पिछले साल आई बाढ़ का जिक्र किया गया, जब वहां के किताब विक्रेताओं की मदद के लिए एक "वेट बुक फेयर" का आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से क्षतिग्रस्त किताबें खरीदने के लिए पहुंचे थे। कुछ लोग तो किताबों की स्थिति की परवाह किए बिना भी इन्हें खरीदने के लिए तैयार थे, ताकि बुकवॉर्म की दुकान को दोबारा खड़ा किया जा सके और यह पुस्तक प्रेमियों के लिए एक स्थायी केंद्र बना रहे।

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