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Hindi News भारत राष्ट्रीय नहीं चुका पा रहा था 3.2 लाख रुपये का कर्ज, किसान ने खेत में पेड़ से लटककर दे दी जान

नहीं चुका पा रहा था 3.2 लाख रुपये का कर्ज, किसान ने खेत में पेड़ से लटककर दे दी जान

एक किसान ने 3.2 लाख रुपये का कर्ज चुका पाने में असमर्थ रहने पर अपने ही खेत में पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी। किसान की आत्महत्या के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Farmer Suicide, Farmer Suicide Karnataka, Farmer Suicide News- India TV Hindi Image Source : FILE PHOTO ईरप्पा कुरादागी कर्ज चुका पाने में असमर्थ था।

गदग: कर्नाटक के गदग जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक किसान ने कर्ज चुका पाने में नाकाम रहने पर जान दे दी है। बताया जा रहा है कि किसान पर कुल मिलाकर 3.2 लाख रुपये का कर्ज था। 46 वर्षीय किसान ईरप्पा कुरादागी ने अपने ही खेत में पेड़ में लगाए गए फांसी के फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। ईरप्पा कर्ज चुकता कर पाने की स्थिति में नहीं था और इसलिए काफी परेशान चल रहा था।

पुलिस कर रही है किसान की खुदकुशी के मामले की जांच

अभी तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ईरप्पा ने 3 फरवरी को अपने खेत में लगे एक पेड़ में लगे फांसी के फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। ईरप्पा ने केवीजी बैंक से 1.2 लाख रुपये का फसल ऋण और विभिन्न सहकारी समितियों से 2 लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया था। इस तरह किसान के ऊपर कुल 3.2 लाख रुपये का कर्ज हो गया था जिसे चुका पाने में वह असमर्थ था। यही वजह है कि उसने कर्ज चुका पाने की कोशिश से ज्यादा जान देना बेहतर समझा। पुलिस ने ईरप्पा की खुदकुशी के मामले को दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

कर्नाटक में किसान आत्महत्या के काफी ज्यादा मामले

बता दें कि कर्नाटक देश के उन राज्यों में से है जहां किसानों की आत्महत्या के मामले काफी ज्यादा देखने को मिलते हैं। किसानों की आत्महत्या के सबसे बड़े कारणों में फसलों का खराब हो जाना, कर्ज चुका पाने की स्थिति में न होना शामिल है। कर्नाटक के 3 जिलों बेलगावी, हावेरी और धारवाड़ जिलों में किसानों की आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। पिछले कुछ सालों में किसानों की आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं जबकि कर्नाटक दूसरे नंबर पर है। इस तरह देखा जाए तो कर्नाटक में किसानों की आत्महत्या बहुत ही ज्यादा चिंता का विषय है।

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