"माइक विपक्ष के खिलाफ अस्त्र", ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर गौरव गोगोई के तीखे वार
लोकसभा में गौरव गोगोई ने कहा कि देश को पता होना चाहिए कि किस तरह से संविधान और सदन की मर्यादा का उल्लंघन हो रहा है। इस अविश्वास प्रस्ताव को लाने में विपक्ष को कोई खुशी नहीं है।
लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों द्वारा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर गर्मागर्म बहस हुई। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संसदीय गरिमा और संविधान की रक्षा के लिए उठाया गया कदम है।
"माइक को बनाया जा रहा है अस्त्र"
गौरव गोगोई ने सदन के संचालन पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान में लोकसभा में 'माइक' को एक अस्त्र की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी या अन्य विपक्षी नेता अहम मुद्दे उठाना चाहते हैं, तो उन्हें बोलने नहीं दिया जाता और उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं। गोगोई ने कहा, "हमें यह प्रस्ताव लाने में कोई खुशी नहीं है, लेकिन सदन में जनता का विश्वास कायम रखने के लिए हमें इस 'धर्म' का पालन करना पड़ रहा है।"
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
चर्चा के दौरान गोगोई ने कई पुराने वाकयों का जिक्र किया। गोगोई ने दावा किया कि फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान जब नेता प्रतिपक्ष बोलने खड़े हुए, तो जानबूझकर 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। गोगोई ने किरेन रीजीजू को भविष्य के रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा व्यवधान पैदा करने वाला संसदीय कार्य मंत्री बताया।
गृह मंत्री अमित शाह ने गोगोई की बात पर चुटकी लेते हुए कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि रीजीजू ने व्यवधान पैदा किया, लेकिन देश के इतिहास में इससे ज्यादा गैर-जिम्मेदार विपक्ष कभी नहीं देखा गया।
सीमा सुरक्षा, व्यापार समझौतों पर घेरा
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मुद्दों को भी सदन के पटल पर रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे, तब देश का नेतृत्व कमजोर साबित हुआ। साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए उस मुद्दे का भी समर्थन किया, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किसी दबाव में किया गया है। गोगोई ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष तथ्यों को सत्यापित करने के लिए तैयार थे, तब भी सत्तापक्ष ने उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की।
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