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'अध्यक्ष की कुर्सी पर हूं लेकिन एक सवाल है', जब पीठासीन सभापति ने पूछा पूरक प्रश्न; लोकसभा में दिखा दुर्लभ नजारा

संसदीय कार्यवाही में आज एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जब लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पीठासीन अधिकारी ने स्वयं एक प्रश्न पूछा। तेलुगु देशम पार्टी के नेता कृष्णा प्रसाद तेनेती उस समय आसन पर थे, जब दुर्लभ मृदा खनिजों पर उनके द्वारा सूचीबद्ध एक प्रश्न चर्चा के लिए आया।

Krishna Prasad Tenneti - India TV Hindi
Image Source : PTI पीठासीन सभापति कृष्ण प्रसाद तेन्नेटी

नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला जब पीठासीन सभापति कृष्ण प्रसाद तेन्नेटी ने प्रश्नकाल में आसन से ही सदस्य के रूप में पूरक प्रश्न पूछा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने उसका उत्तर दिया। दरअसल, लोकसभा में प्रश्नकाल के एक हिस्से की कार्यवाही का संचालन पीठासीन सभापति तेन्नेटी कर रहे थे। इस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सदस्यों के पूरक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान तेन्नेटी ने कहा कि वैसे अगला पूरक प्रश्न मेरे नाम पर है। अगर आप चाहें तो आप जवाब दे सकते हैं या मैं आपके कक्ष में आकर बातचीत कर सकता हूं। इस पर केंद्रीय मंत्री सिंह ने मुस्कराते हुए कहा, ''मुझे नहीं पता कि सभापति से प्रश्न पूछने के लिए कहा जा सकता है या नहीं। अगर आप चाहें तो मुझे उत्तर देने में प्रसन्नता होगी।''

पीठासीन सभापति ने क्या पूछा?

इसके बाद पीठासीन सभापति ने कहा कि वह सदन की अनुमति से पूछना चाहेंगे कि तटीय क्षेत्रों में दुर्लभ तत्वों के खनन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए कैसे काम किया जाता है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्र तटीय क्षेत्रों में सात खनिजों के समूह में दुर्लभ तत्व मिलते हैं। उन्होंने कहा कि 2014-15 में एक मुद्दा आया था कि ग्रेफाइट खनन के साथ संबंधित ठेकेदार ने अवैध तरीके से मोनोजाइट का भी खनन कर लिया था। उन्होंने कहा, ''हमने इसे रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।''

केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब

केंद्रीय मंत्री ने एक अन्य पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह भी कहा कि पीएम मोदी ने 2023 में विशाखापत्तनम में सोमेरियम कोबाल्ट मैग्नेट संयंत्र की शुरुआत की थी। इस संयंत्र से पहले चरण में करीब 2000 टन प्रतिवर्ष उत्पादन होगा, दूसरे चरण में 5000 टन खनिज का उत्पादन होगा। विडंबना यह है कि हमारी वर्तमान आवश्यकता 4000 टन है और 2030 तक हमारी जरूरत 8000 टन परमानेंट मैग्नेट की हो जाएगी, लेकिन तब तक भी हमारा उत्पादन 5000 टन ही रहेगा। सिंह ने कहा कि इसलिए सरकार को बड़ी मात्रा में दुर्लभ तत्वों का आयात करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन पिछले 10-11 साल में प्रधानमंत्री मोदी के हस्तक्षेप से इस दिशा में प्रगति हुई है और सरकार ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।  

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