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मणिपुर में सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू, बीजेपी ने तरुण चुग को विधायक दल का नेता चुनने के लिए नेशनल ऑब्जर्वर बनाया

तरुण चुग को विधायक दल का नेता चुनने की प्रक्रिया के लिए नेशनल ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। मणिपुर में बीजेपी के पास बहुमत है, लेकिन राज्य में अस्थिरता के कारण राष्ट्रपति शासन लागू है।

Tarun Chugh- India TV Hindi
Image Source : PTI बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (बाएं), तरुण चुग (दाएं)

भारतीय जनता पार्टी ने मणिपुर में सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी के विधायक दल के नेता का चुनाव जल्द ही होगा। इसके लिए तरुण चुग को नेशनल ऑब्जर्वर बनाया गया है। मणिपुर में बीजेपी के पास बहुमत है, लेकिन मैतेयी और कुकी समुदाय के बीच हिंसक झड़प के चलते मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया था और सरकार गिर गई थी। इसके बाद से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। अब यहां के हालात ठीक हुए हैं। ऐसे में बीजेपी ने दोबारा सरकार बनाने की पहल शुरू की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कुकी और मैतेयी, दोनों समुदाय के नेताओं को सीएम और डिप्टी सीएम का पद देकर संतुलन बनाया जा सकता है।

मणिपुर से एनडीए के विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। यहां बैठक के दौरान राज्य में लोकप्रिय सरकार बनाने की पहल हो सकती है। मंगलवार को सभी विधायकों की बैठक होगी। इस दौरान सभी विधायकों की सहमति से सीएम और डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि अगले सप्ताह पूरी हो रही है। मणिपुर के करीब 20 विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंचे, जबकि बाकी के विधायक भाजपा नेतृत्व के निर्देश पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे। भाजपा नेतृत्व से उम्मीद की जा रही है कि वह अगले कुछ दिनों में यह फैसला लेगा कि मणिपुर में पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार का गठन करना है या नहीं।

मणिपुर में पिछले साल लगा था राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में पहली बार 13 फरवरी, 2025 को मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। अगस्त 2025 में इसे और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था। मणिपुर के जो नेता दिल्ली आए है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, मौजूदा समय में स्थगित विधानसभा के अध्यक्ष सत्यब्रता सिंह और पूर्व मंत्री वाई खेमचंद सिंह शामिल हैं। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी भी राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले कुछ महीनों में अपने मेइती और कुकी विधायकों, सहयोगी दलों एनपीएफ और एनपीपी और कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ अलग-अलग कई बैठकें कीं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए राजनीतिक स्थिति अनुकूल है।

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