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'पब्लिक डोमेन में है पूरा आर्टिकल, तो फिर राहुल गांधी को क्यों चुप करा रही सरकार, शशि थरूर ने खड़े किए सवाल

 Published : Feb 02, 2026 05:35 pm IST,  Updated : Feb 02, 2026 06:36 pm IST

कांग्रेस सांसद ने राहुल गांधी का समर्थन किया है। थरूर ने कहा कि राहुल गांधी को सदन में बोलने देना चाहिए था। सरकार को राहुल गांधी सुनना को चाहिए था और फिर जवाब देना चाहिए था।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर- India TV Hindi
कांग्रेस सांसद शशि थरूर Image Source : ANI

संसद में आज राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का जिक्र करते हुए मोदी सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने एलएसी पर चीनी टैंक का जिक्र किया है। इस पर संसद में काफी बहस हुई और सदन को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की प्रतिक्रिया सामने आई है। 

राहुल गांधी को बोलने देना चाहिए था- थरूर

शशि थरूर ने कहा, 'मुझे लगता है कि सरकार की तरफ से ज्यादा रिएक्शन दिया गया, क्योंकि जहां तक मैं समझा, राहुल जी जिस मुद्दे को उठाना चाहते थे, वह पहले से ही पब्लिक डोमेन में है। वह कारवां मैगजीन में छपे एक आर्टिकल का हवाला दे रहे थे, जिसमें जनरल नरवणे के एक संस्मरण का जिक्र है जो अभी तक पब्लिश नहीं हुआ है। इसलिए सरकार को इस बात पर आपत्ति जताने के बजाय कि किताब पब्लिश नहीं हुई है, उन्हें बोलने देना चाहिए था।' 

कोई भी वही आर्टिकल पढ़ सकता है 

थरूर ने आगे कहा, 'क्योंकि वैसे भी, मैगजीन पब्लिकली अवेलेबल है। कोई भी वही आर्टिकल पढ़ सकता है जो राहुल जी ने पढ़ा है। मुझे लगता है कि सरकार के ज्यादा रिएक्शन ने आज दोपहर बेवजह सदन को ठप कर दिया। और सच कहूं तो, मेरे हिसाब से संसद के लिए यह बेहतर होता कि चर्चा आगे बढ़ने दी जाती, संसद इसी के लिए है। अगर तथ्य गलत हैं, तो सबसे अच्छा जवाब तथ्यों को ठीक करना है, न कि तथ्यों को सामने आने से रोकना है।'

सरकार को ज्यादा प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं थी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'उन्हें अपनी चिंताएं बताने का मौका ही नहीं मिला। आर्टिकल में सेना या सैनिकों पर बिल्कुल भी आरोप नहीं लगाया गया है। यह मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा लिए गए या न लिए गए कुछ फैसलों के बारे में है। और साफ तौर पर राहुल जी यही मुद्दा उठाना चाहते थे। मैं बस इतना कह सकता हूं कि मुझे लगता है कि सरकार को ज्यादा प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं थी।'

नेहरू के जमाने में सदनों में होती थीं ऐसी बहसें

थरूर ने कहा, 'नेहरू जी के समय कांग्रेस ने जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया, वह था संसद में बहस करवाना। नवंबर में हर दिन, 1962 का चीन युद्ध चल रहा था और संसद में बहस हो रही थी। जहां कोई व्हिप नहीं था। यहां तक कि सरकारी सांसद भी सरकार और प्रधानमंत्री नेहरू की आलोचना कर पा रहे थे। हमारी संसद में 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान, संसदीय सत्र चल रहे थे। संसद को जानकारी दी गई थी। देश को भरोसे में लिया गया था।'

ऐसी सरकार क्यों है जो चर्चा से डरती

राहुल गांधी के बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'हमारे पास ऐसी सरकार क्यों है जो चर्चा से डरती है? यह सच में दुख की बात है। मैं मुझे लगता है कि सरकार को इस तरह से रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। उन्हें बातचीत को बढ़ावा देना चाहिए था, गलतफहमी दूर करनी चाहिए थी, चीजें साफ करनी चाहिए थीं, चीन का पूरा मामला पूरे देश के लिए बहुत चिंता का विषय है। चीन पर पूरी चर्चा होनी चाहिए।' 

यह हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं 

थरूर ने आगे कहा, 'विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, उन सबको बोलने दें और लोगों को पता चलने दें कि क्या हो रहा है। ऐसी स्थिति न हो कि सब कुछ छिपा दिया जाए। यह हमारे लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। यह संसद के कामकाज के लिए भी अच्छा नहीं है।'

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