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500 साल में पहली बार बांके बिहारी को क्यों नहीं मिला समय पर भोग? VIP एंट्री और दर्शन व्यवस्था में बदलाव पर भी बड़ी खबर

मथुरा के वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि पैसे की लालच की वजह से बांके बिहारी को विश्राम भी नहीं करने दिया जाता। वहीं, 500 साल में पहली बार बांके बिहारी को समय पर भोग नहीं मिला है।

Shri Banke Bihari Temple, Vrindavan, Mathura- India TV Hindi
Image Source : PTI वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि पैसे की लालच की वजह से बांके बिहारी को विश्राम भी नहीं करने दिया जाता है। मुख्य न्यायाधीश की इस टिप्पणी के बाद सोमवार को बांके बिहारी मंदिर हाई पॉवर कमेटी की चेयरमैन अशोक गुप्ता मंदिर की व्यवस्था देखने पहुचे थे। उन्होंने मंदिर के VIP गेट, गेट नम्बर 5 पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों से बात की। वहां पता चला कि एक सेवादार दिन में 30 से 35 लोगों को VIP दर्शन करवाता है। VIP दर्शन का रेट कम से कम 500 रुपये हैं। और ज्यादा जितना मिल सके। ये पैसा सेवायत खुद रखता है। अशोक गुप्ता ने आदेश दिया कि अब एक सेवायत दिन में 2 से 4 लोगों को ही VIP दर्शन करा सकता है।

देहरी पूजा पर भी फिलहाल रोक

इसके साथ कि बांके बिहारी मंदिर में देहरी पूजा पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। देहरी पूजा कपाट बंद होने के बाद होती है। इस पूजा के लिए सेवायत अपने यजमानों को बुलाता है। मोटी दक्षिणा लेता है। देहरी पूजा बांके बिहारी की बापट के पास यजमानों को बिठाकर किया जाता है। दिन और रात में जब भी बांके बिहारी का कपाट बंद होता है तब से लेकर कपाट खुलने तक देहरी पूजा होती है।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

ये सारा विवाद तब शुरू हुआ जब हाई पावर कमेटी ने बांके बिहारी मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने की बात की। ये मुद्दा कमेटी की मीटिंग में उठाया गया। कमेटी के अध्यक्ष के मुताबिक, सर्व सम्म्मति से ये फैसला लिया गया कि मंदिर में दर्शन का समय 2 घंटे बढ़ा दिया जाए। लेकिन इससे पहले कि ये फैसला लागू हो पाता, गोस्वामी समाज का एक वर्ग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

कमेटी के चेयरमैन क्या बोले?

मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी पर हमने बांके बिहारी हाई पॉवर कमेटी के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस अशोक गुप्ता से बात की। अशोक गुप्ता का कहना है कि गोस्वामी समाज के लोग जो कमेटी में हैं उनकी सहमति से मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने का फैसला लिया गया था। लेकिन अपनी लिखित सहमति के बाद भी वो कोर्ट चले गए। जहां तक बांके बिहारी को विश्राम नहीं करने देने की बात है तो पट बंद होने के बाद देहरी पूजन के नाम से भगवान को ये विश्राम नहीं करने देते थे। मुझे ये जिम्मेदारी मिली है कि बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए जो आते हैं उनको आसानी से दर्शन हो सके। लेकिन परिवर्तन लोगों को आसानी से पसंद नहीं आता है।

500 वर्षों में पहली बार समय से नहीं मिला भोग

15 दिसंबर को बांके बिहारी को सुबह का भोग समय पर नहीं मिल पाया। सुबह 8 बजे कपाट खुलने से पहले बांके बिहारी को भोग मिल जाना चाहिए। जो कि 30 से 45 मिनट लेट मिल पाया। इसकी वजह बताई जा रही है कि बांके बिहारी के भोग के लिए इसी साल अक्टूबर में ठेका मयंक गुप्ता नाम के हलवाई को दिया गया था। इस काम के लिए उसे हर महीने 90 हज़ार देना तय हुआ था। मयंक गुप्ता ने 15 अक्टूबर से भोग देना शुरू किया था। जबकि इसस पहले के ठेकेदार को 5 नवंबर तक का पेमेंट किया जा चुका था। कमेटी की तरफ से मयंक गुप्ता को कहा गया कि 5 नवंबर से उसका ठेका माना जायेगा। 15 अक्टूबर से 5 नंवबर तक पैसा पहले वाले ठेकेदार को मयंक गुप्ता को देना था। जो मयंक गुप्ता को नहीं मिला।

जब सुबह आठ बजे तक भगवान का भोग नहीं आया तो कमेटी के लोगों ने ठेकेदार से बात की और उसका पेमेंट किया और 45 मिनट की देरी से भगवान को भोग लग पाया। इस घटना पर कमेटी अध्यक्ष अशोक गुप्ता का कहना है कि ये जानकारी हमारे संज्ञान में आई है। अब हम इस व्यवस्था को बदलने वाले हैं। अबतक ठाकुर जी के पैसे से ही उनका भोग लगता था। लेकिन अब इसके लिए एक कमेटी बनाई जा रही है जो भक्तों के पैसे से भगवान का भोग लगाएगा। ठाकुर जी के भोग के लिए भी अब पहले से ही बुकिंग हो जाएगी जिससे भविष्य में दिक्कत न हो। वहीं, दिनेश गोस्वामी जिसने मयंक गुप्ता से भोग मंगवाया था। उनका कहना है कि इस मामले में पहले ठेकेदार ने मयंक गुप्ता को पैसे नहीं दिए थे। इस वजह से सुबह का भोग थोड़ी देर से पहुंचा, लेकिन शाम से सब ठीक हो गया।

1 जनवरी से बदल जाएगी दर्शन व्यवस्था

नए साल के पहले दिन से वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन की व्यवस्था बदल जाएगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी का मानना है कि उसके बाद भक्त जनों को बांके बिहारी के दर्शन में दिक्कत नहीं आएगी। अभी की व्यवस्था के मुताबिक, बांके बिहारी के दर्शन के मंडूर के गेट नम्बर 2 और 3 के सामने इकट्ठा भक्तों को एक साथ मंदिर में भेजा जाता है। बांके बिहारी मंदिर में एक साथ 300 लोग से अधिक लोग दर्शन नहीं कर सकते हैं। लेकिन मंदिर के अंदर हमेशा डेढ़ हजार से 2 हज़ार लोग मौजूद होते हैं। भगदड़ की स्थिति रहती है।

इसी को देखते हुए नया प्लान बनाया गया है। अब बांके बिहारी मंदिर से सिर्फ लाइन से ही लोग दर्शन कर पाएंगे। मंदिर के गेट नम्बर 2 और 3 से 3-3 लाइन में भक्तों को अंदर भेजा जाएगा। 2 नम्बर गेट से जो अंदर जाएंगे वो 1 नम्बर गेट से निकल जाएंगे। और गेट नम्बर 3 से जो जाएंगे वो 4 नम्बर गेट से बाहर निकल जाएंगे। ऐसे में मंदिर के अंदर कभी भीड़ नहीं होगी।

मंदिर के अंदर रेलिंग लगाने का काम शुरू

इस नई व्यवस्था के लिए मंदिर के अंदर रेलिंग लगाई जाएगी जिसका काम शुरू हो गया है। आज रेलिंग लगाने के लिए नाप जोख शुरू हो गयी। कमेटी ने बताया है कि 25 दिसम्बर तक सारा काम पूरा कर लिया जाएगा जिससे कि नए साल में बांके बिहारी के दर्शन में दिक्कत न आये। 

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