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दातून करते वक्त खाने की नली में फंस गई लकड़ी, 7 दिन तक भूखे रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग, ऑपरेशन के बाद ली राहत की सांस

80 वर्षीय कामराजू रोज की तरह दांत घिस रहे थे, तभी गलती से दातून का एक टुकड़ा उनके गले से नीचे चला गया और फूड पाइप में फंस गया। दातून फंसते ही कामराजू को सीने में तेज दर्द और पेट में असहनीय पीड़ा होने लगी।

बुजुर्ग की भोजन नली...- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT बुजुर्ग की भोजन नली में फंसा था 9 इंच का दातून

ओडिशा के गंजाम जिले के नाटंगा गांव से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां 80 साल के एक बुजुर्ग कामराजू नायक को सिर्फ दातून करने की वजह से 7 दिन तक भूखे रहना पड़ा। असल में, रोज की तरह जब वह दांत घिस रहे थे, तभी गलती से दातून का एक टुकड़ा उनके गले से नीचे चला गया और फूड पाइप में फंस गया।

दातून फंसते ही कामराजू को सीने में तेज दर्द और पेट में असहनीय पीड़ा होने लगी। परिवार ने शुरुआत में कई घरेलू उपाय किए, लेकिन दातून न निकलने से हालत बिगड़ती गई। पहले दिन से ही उन्हें खाना निगलने में दिक्कत हो रही थी, और धीरे-धीरे हालत ऐसी हो गई कि एक निवाला भी नीचे नहीं जा पा रहा था।

ज्यादा उम्र के चलते जोखिम भरा था ऑपरेशन

कामराजू के परिवार वाले उन्हें कई मेडिकल सेंटर में दिखाने के बाद अंत में ब्रह्मपुर के MKCG मेडिकल कॉलेज ले गए। यहां ENT विभाग के डॉ. संजीत कुमार मिश्रा और उनकी टीम ने तुरंत जांच की। जांच में पता चला कि दातून का टुकड़ा फूड पाइप में फंसा हुआ है। कामराजू की उम्र ज्यादा होने के कारण ऑपरेशन करना जोखिम भरा था। उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं। ऐसे में डॉक्टरों ने बड़ी सावधानी से इलाज की योजना बनाई।

Image Source : reporter inputडॉक्टरों ने ऑपरेशन कर दातून को बाहर निकाला।

‘एसोफोगास्कोपी’ तकनीक का किया इस्तेमाल 

डॉक्टरों की 9 सदस्यीय टीम ने ‘एसोफोगास्कोपी’ नाम की एक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में गले के अंदर एक खास ट्यूब डाली जाती है जिससे अंदर की चीजों को देखा और निकाला जा सकता है। इसी ट्यूब के जरिए धीरे-धीरे दबाव बनाकर दातून को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और अब कामराजू नायक पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं।

क्या बोले डॉक्टर?

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, बुजुर्ग की उम्र और हालत को देखते हुए यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था। सर्जरी से पहले उनकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ा गया।

यह घटना बताती है कि उम्रदराज लोगों के साथ छोटी-छोटी सावधानियां जरूरी हैं। दातून या किसी भी कठोर चीज से दांत घिसते समय ध्यान न देने पर जानलेवा स्थिति बन सकती है। समय पर इलाज न होता, तो मामला और गंभीर हो सकता था।

(ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट)

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