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Hindi News भारत राष्ट्रीय Rajat Sharma's Blog | बांग्लादेश : तारिक़ रहमान ने की एक अच्छी शुरुआत

Rajat Sharma's Blog | बांग्लादेश : तारिक़ रहमान ने की एक अच्छी शुरुआत

तारिक रहमान की पहली चुनौती होगी, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और NCP को काबू में करना। उन्हें बांग्लादेश में दंगे और अराजकता को रोकना होगा और पड़ोसी मुल्कों से रिश्ते सुधारने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था सुधारने पर भी काम करना होगा।

Rajat sharma Indiatv- India TV Hindi Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

बांग्लादेश में कई बड़े बदलाव हुए। 35 साल बाद पहली बार कोई पुरुष प्रधानमंत्री बना। दूसरा बड़ा बदलाव ये हुआ कि भीड़तंत्र की मदद से कुर्सी पर बैठे मोहम्मद यूनुस का काम तमाम हो गया। तारिक़ रहमान ने मोहम्मद यूनुस की संविधान बदलने की चाल को नाकाम कर दिया। तारिक़ रहमान ने ऐलान किया कि बांग्लादेश में अब कोई नया संविधान नहीं बनेगा। एक और नई बात ये हुई कि तारिक रहमान ने अपने मंत्रिमंडल में एक हिंदू और एक बौद्ध नेता को जगह दी। नए प्रधानमंत्री ने 'सबका साथ सबका विकास' की बात की।

सियासत के लिहाज से एक बड़ा बदलाव ये हुआ कि जमात-ए-इस्लामी और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ने तारिक रहमान के खिलाफ जंग का एलान कर दिया। ये दोनों पार्टियां कट्टरपंथी हैं। इन्हीं दोनों पार्टियों ने सड़कों पर दंगा करके शेख हसीना को ढाका से भगाया था। दोनों पार्टियों ने मंगलवार को शपथ समारोह  का बहिष्कार किया।

अब सवाल ये है कि क्या ये पार्टियां फिर से जनता को भड़काएंगी?  क्या तारिक रहमान इन कट्टरपंथियों पर लगाम लगा पाएंगे? क्या बांग्लादेशी हिन्दुओं को सुरक्षा दे पाएंगे? बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का भारत पर क्या असर होगा?

पैंतीस साल के बाद ये पहला मौका है, जब बांग्लादेश में कोई पुरुष प्रधानमंत्री बना है ।पैंतीस सालों से बांगालदेश की कमान या तो तारिक रहमान की मां बेगम खालिदा जिया या फिर अवामी लीग की बेगम शेख हसीना के हाथों में रही है। इस बार अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं थी, तो BNP को दो तिहाई से ज्यादा बहुमत मिला और तारिक रहमान प्रधानमंत्री बन गए।

पद संभालते ही तारिक रहमान ने सबसे पहले मुहम्मद युनूस के एजेंडे को किनारे किया।  ऐलान कर दिया कि बांग्लादेश मौजूदा संविधान पर ही चलेगा, कोई नया संविधान नहीं बनाया जाएगा। दूसरी बड़ी बात ये है कि तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट में एक हिन्दू और एक बौद्ध नेता को भी मंत्री बनाया है। 

जमात-ए-इस्लामी और NCP ने तारिक रहमान के शपथ ग्रहण का बहिष्कार क्यों किया? इसकी वजह साफ है कि ये दोनों पार्टियां बांग्लादेश को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहती हैं। मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश का संविधान बदलना चाहते थे। इसके लिए  संसदीय चुनावों क् साथ ही जनमतसंग्रह कराया गया था। 68 परसेंट से ज्यादा लोगों ने संवैधानिक बदलाव के पक्ष में वोट किया। इसलिए सांसदों को जो शपथ दिलाई जानी थी, उसमें संविधान सुधार परिषद की शपथ को भी शामिल किया जाना था,  लेकिन तारिक रहमान ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद BNP के सासंदों ने संविधान को बदलने की शपथ लेने से इनकार कर दिया। लेकिन जमात ए इस्लामी और एनसीपी ने जनमतसंग्रह से जुड़ी संवैधानिक सुधार परिषद की शपथ ली।।

60 साल के तारिक रहमान बांग्लादेश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने हैं। उनकी मां बेगम खालिदा जिया तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। थोड़े दिनों पहले उनकी मृत्यु हुई। तारिक रहमान के पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे। जिया उर रहमान बांग्लादेश के आर्मी चीफ भी रहे। 1971 की जंग के समय जिया उर रहमान ने ही चटगांव में बांग्लादेश बेतार केंद्र से बांग्लादेश की आज़ादी का ऐलान किया था।

1981 में चटगांव में ही जिया उर रहमान की हत्या कर दी गई थी। उस वक्त तारिक रहमान की उम्र सिर्फ 16 साल थी। तारिक रहमान सियासत में नए नहीं है। वह 1988 में BNP के सदस्य़ बने थे, 2002 में पार्टी के सचिव बने। इसके बाद जब शेख हसीना की सरकार आई तो तारिक रहमान के खिलाफ 84 मुकदमे दर्ज हो गए। एक केस में उन्हें सजा भी हुई। 18 महीने जेल में रहे। जमानत लेकर वो इलाज के लिए लंदन चले गए और 17 साल तक लंदन में ही रहे। 

चूंकि तारिक रहमान की मां बेगम खालिदा जिया जेल में बीमार थीं, इसलिए तारिक रहमान ने लंदन में रहकर ही पार्टी का कामकाज संभाला। 2024 में शेख हसीना का तख्तापलट हुआ। मोहम्मद युनूस बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया बने। उन्होंने तारिक रहमान के खिलाफ केस  वापस लिए जिसके बाद तारिक़ रहमान पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटे। उन्होंने चुनाव में पार्टी की कमान संभाली और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 

तारिक रहमान को सरकार चलाने का अनुभव नहीं है। अब उनकी पहली चुनौती होगी, कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और NCP को काबू में करना। उन्हें बांग्लादेश में दंगे और अराजकता को रोकना होगा और पड़ोसी मुल्कों से रिश्ते सुधारने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था सुधारने पर भी काम करना होगा। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 17 फरवरी, 2026 का पूरा एपिसोड

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