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Hindi News भारत राष्ट्रीय Rajat Sharma's Blog | फड़णवीस का जादू चल गया: परिवार वाले कहां जाएं ?

Rajat Sharma's Blog | फड़णवीस का जादू चल गया: परिवार वाले कहां जाएं ?

महाराष्ट्र के चुनाव में बीजेपी की इतनी बड़ी जीत पहले कभी नहीं हुई। लेकिन ये भी सच है कि महाराष्ट्र के चुनाव में देवेंद्र फडणवीस को हराने के लिए इतनी बड़ी कोशिश भी कभी नहीं हुई। क्या-क्या नहीं किया गया ?

Rajat sharma Indiatv- India TV Hindi Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में बीजेपी और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को प्रचण्ड जीत हासिल हुई है। कुल 29 नगर निगमों में से 25 पर महायुति का कब्ज़ा हो गया है। इनमें से 17 पर अकेले बीजेपी का कब्ज़ा हो गया है।  मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस इन चुनावों में महाराष्ट्र के सबसे बड़े लीडर बनकर उभरे। फडणवीस ने जो कहा था, वो करके दिखाया। उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई और उद्धव ठाकरे की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। उद्धव ठाकरे राज ठाकरे के साथ मिलकर भी अपना आखिरी गढ़ वृहन्मुम्बई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) को बचा नहीं पाये। पहली बार मुंबई में BMC पर बीजेपी-शिंदे सेना महायुति का कब्जा हो गया।

बीएमसी के कुल 227 वार्ड में से BJP ने 89, शिवसेना (शिंदे) ने 29, कांग्रेस ने 24, शिवसेना (UBT) ने 65 और MNS ने 6 सीटें जीती। AIMIM को 8, NCP को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और NCP (शरद पवार) को सिर्फ एक सीट मिली।

एकनाथ शिन्दे की पार्टी ने उद्धव ठाकरे की शिव सेना से बेहतर प्रदर्शन किया। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में अजित पवार और शरद पवार मिलकर भी बीजेपी को नहीं रोक पाए लेकिन दूसरे इलाकों में भतीजा, अपने चाचा पर भारी पड़ा। शरद पवार की पार्टी की हालत सबसे बुरी हुई। चुनाव में कांग्रेस की लुटिया डूब गई। बीजेपी के बाद सबसे अच्छा स्ट्राइक रेट असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का रहा। मुंबई में उसके 8 पार्षद जीते।

शुक्रवार को शिवसेना भवन में सन्नाटा छाया रहा। राज ठाकरे ने कहा कि इस हार के बावजूद उनकी पार्टी मराठी मानुष के हितों के लिए काम करती रहेगी। शिवसेना की BMC से विदाई तीस साल के बाद हुई है। यहां बीजेपी-शिंदे शिवसेना की महायुति को 118 सीट मिलीं हैं जो बहुमत के आंकड़े से चार ज्यादा है। करीब 20 साल बाद एक साथ आए ठाकरे बंधु अपना गढ़ नहीं बचा पाए। उद्धव शिव सेना को 65 और राज ठाकरे की मनसे को 6, यानि कुल 71 सीटें ही मिल पाई। राज ठाकरे की पार्टी ने 53 उम्मीदवार खड़े किये, लेकिन सिर्फ 6 सीटों पर जीत मिली।

BMC में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी और उसी को मेयर का पद मिलेगा। राज्य की 29 महानगर पालिकाओं में से 25 में  महायुति को जीत मिली है। इसमें से 22 में बीजेपी का मेयर बनना तय है। चूंकि फडणवीस के नेतृत्व में चुनाव लड़े गये, फडणवीस ने खुद रणनीति बनाई, सारे जिलों में जाकर खुद प्रचार किया, इसलिए इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय फडणवीस को ही मिलेगा। सिर्फ मुंबई नहीं, फडणवीस के अपने शहर नागपुर में बीजेपी ने जबरदस्त परफॉर्म किया, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में शरद पवार और अजीत पवार की जोड़ी को मात दी, परभणी नगर पालिका कांग्रेस से छीन ली और औरंगाबाद, नासिक में भी परचम लहराया। इसलिए ये तो कहना पड़ेगा कि इस मुकाबले में ‘मैन ऑफ द मैच’ देवेन्द्र फडणवीस ही हैं।

महाराष्ट्र के चुनाव में बीजेपी की इतनी बड़ी जीत पहले कभी नहीं हुई। लेकिन ये भी सच है कि महाराष्ट्र के चुनाव में देवेंद्र फडणवीस को हराने के लिए इतनी बड़ी कोशिश भी कभी नहीं हुई। क्या-क्या नहीं किया गया ? उद्धव और राज ठाकरे पुरानी दुश्मनी भुलाकर साथ आए। शरद पवार और अजित पवार ने रिश्तों की कड़वाहट भुला दी। कांग्रेस ने प्रकाश आंबेडकर के साथ गठजोड़ किया, नए रिश्ते जुड़े, नये गठबंधन बने लेकिन बीजेपी की प्रचंड जीत ने सारी कोशिशों को नाकाम साबित कर दिया।

सबसे बुरी हालत कांग्रेस की हुई जिसका एक जमाने में महाराष्ट्र पर एकछत्र राज था। समस्या ये है कि कांग्रेस अपनी हार की वजह कभी EVM में ढूंढती है, कभी स्याही  में, तो कभी वोटर लिस्ट में और अब बाकी विरोधी दल भी इसी लाइन पर चल पड़े। जब बीमारी का diagnosis ही गलत होगा तो वो इलाज कैसे करेंगे ?  जबतक वो ये नहीं देखेंगे कि बीजेपी कितनी एडवांस में तैयारी शुरू कर देती है, तब तक उन्हें जीत का रास्ता नहीं मिलेगा। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 16 जनवरी, 2026 का पूरा एपिसोड

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