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क्यों भारत के दौरे पर आ रहे UAE के राष्ट्रपति, जानें PM मोदी के साथ किन मुद्दों को लेकर होगी बैठक

यूएई के राष्ट्रपति अल नाहयान आज भारत दौरे पर आ रहे हैं। यहां वह पीएम मोदी के साथ बैठक भी करेंगे। इस दौरान कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

भारत दौरे पर यूएई का राष्ट्रपति अल नाहयान। - India TV Hindi Image Source : AP भारत दौरे पर यूएई का राष्ट्रपति अल नाहयान।

नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह भारत के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तौर तरीकों पर चर्चा करने के लिए सोमवार को नई दिल्ली की यात्रा पर आएंगे। यूएई के राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका संबंधों में आई तीव्र गिरावट, यमन को लेकर सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ते तनाव और गाजा में अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य के कारण उत्पन्न स्थिति के बीच हो रही है। 

विभिन्न मुद्दों पर होगी बात

यूएई के राष्ट्रपति की यात्रा के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि व्यापार और निवेश, रक्षा उद्योग सहयोग और ऊर्जा पहलों पर भारतीय नेतृत्व के साथ वार्ता होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकात के दौरान चर्चा होने की संभावना है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति 19 जनवरी को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। सत्ता संभालने के बाद से नाहयान की यह भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा होगी, जबकि गत 10 वर्षों में यह उनकी पांचवीं यात्रा होगी। 

दोनों देशों के बीच अहम साझेदारी

बता दें कि हाल ही में 2022 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है। CEPA ने हजारों उत्पादों पर शुल्क कम कर दिए हैं और भारतीय इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्यात को बढ़ावा दिया है, साथ ही भारत के बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में संयुक्त अरब अमीरात के निवेश को सुगम बनाया है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया, जिसमें गैर-तेल व्यापार अकेले वर्ष की पहली छमाही में लगभग 37.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34% की वृद्धि है। इससे दोनों देश 2030 तक गैर-तेल व्यापार में 100 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।

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