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रात 1:30 बजे कैंप से निकली और गायब! बबीता पांडे के मोबाइल की लास्ट लोकेशन 200 मीटर दूर मिली

बबीता पांडे के लापता होने के 13वें दिन भी उत्तरकाशी की पहाड़ियों में सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन जारी है। जिस दयारा बुग्याल ट्रैक से बबीता लापता हुई है, वो उत्तराखंड के सबसे मशहूर अल्पाइन घास के मैदानों में गिना जाता है।

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Image Source : PTI/INSTAGRAM- BABITA PANDEY बबीता पांडे 13 दिन से लापता है।

उत्तराखंड के दयारा बुग्याल ट्रेक के पास से लापता हुई एमबीए की स्टूडेंट बबीता पांडे के लापता होने के 13वें दिन भी तलाश जारी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बबीता के मोबाइल की लास्ट एक्टिव लोकेशन दयारा ट्रेक के पड़ाव गोई क्षेत्र से लगभग 200 मीटर नीचे की बताई जा रही है। बबीता के मोबाइल की लास्ट लोकेशन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है, जिससे रहस्य और गहराता जा रहा है।

लास्ट लोकेशन के आसपास तेज हुई तलाश

एक तरफ प्रशासन की कई टीम कंबाइंड ऑपरेशन के जरिए बबीता को तलाशने में लगी हैं तो वहीं पुलिस ने कोतवाली मनेरी में मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां बबीता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और लोकेशन हिस्ट्री की पड़ताल के साथ बबीता के संपर्क में रहने वाले लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है।

खूबसूरत वादियों में खो गई बबीता?

इस बीच बबीता की एक तस्वीर सामने आई है। 29 तारीख की ये तस्वीर उस कैंप के पास की है जहां बबीता ठहरी हुई थी। दयारा बुग्याल ट्रिप पर गई एमबीए छात्रा बबीता पांडे की ये आखिरी तस्वीर है। इस तस्वीर में बबीता जिन खूबसूरत वादियों को निहार रही है, उन्हीं वादियों में आज देश की 6 बड़ी एजेंसियां बबीता की तलाश में खाक छान रही हैं। सर्च ऑपरेशन में लगे 120 लोगों की टीम में NDRF, SDRF, ITBP, NIM के पर्वतारोही, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग की टीम और लोकल ग्रामीण शामिल हैं। सभी बबीता की तलाश में नदी, तालाब और जंगल छान रहे हैं।

Image Source : instagram- babita pandeyबबीता पांडे

28 मई को दो दोस्तों के साथ CCTV में हुई थी कैद

मैनुअल सर्च के साथ ही ऊंची पहाड़ियों और इंसान की पहुंच से दूर के इलाकों में हेलीकॉप्टर और ड्रोन के जरिए एरियल सर्विलांस भी जारी है तो वहीं डॉग स्कॉयड की टीम भी बबीता का सुराग ढूंढने में लगी है। जिस बबीता की तलाश में सभी लगे हुए हैं, वह अपने दो दोस्तों के साथ 28 मई को रैथल गांव में रुकी थी, जिसकी फुटेज CCTV में कैद हुई थी। एक दिन बाद, उन्होंने रैथल से दयारा बुग्याल के लिए ट्रेकिंग शुरू की और गोई बेस कैंप में रात बिताई। लेकिन बबीता कैंप से लापता हो गई। तब से आज तक बबीता की तलाश जारी है। जिस गोई कैंप के पास से बबीता गायब हुई थी उसे आसपास के जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों, सुनसान स्थानों और जल स्रोतों की भी गहन तलाशी ली जा चुकी है लेकिन अब तक कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा है।

ट्रेकिंग एजेंसी और गाइड पर एक्शन

जांच के दौरान ट्रेकिंग और कैंपिंग एजेंसी की लापरवाही भी सामने आई है। उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी ने संबंधित एजेंसी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। साथ ही विभाग आगे की कार्रवाई भी कर रहा है। 23 साल की बबीता दो भाइयों की इकलौती बहन और परिवार की सबसे बड़ी संतान है। बड़ा भाई हर्षित पांडे और उनकी मां उत्तरकाशी में बचाव टीमों के साथ मौजूद हैं जबकि छोटा भाई तनुज पांडे, दादी और दिव्यांग पिता रामनगर में बबीता के सकुशल वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

Image Source : ptiबबीता की तलाश में 6 एजेंसिया लगीं।

क्यों फेमस है दयारा बुग्याल ट्रैक?

उत्तरकाशी के जिस दयारा बुग्याल ट्रैक से बबीता लापता हुई है वो उत्तराखंड के सबसे मशहूर अल्पाइन घास के मैदानों में गिना जाता है। सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर और गर्मियों में दूर-दूर तक फैले हरे घास के मैदान इसे देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाते हैं। यहां से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। यही वजह है कि हर साल हजारों ट्रेकर इस क्षेत्र का रुख करते हैं। बबीता भी उन्हीं सैलानियों में शामिल थी, जो ट्रैकिंग के जरिए इस खूबसूरती को और करीब से निहारना चाहती थी। लेकिन यहां आकर वह लापता है और तेरहवें दिन भी उसकी तलाश जारी है।

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