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Hindi News झारखण्ड पुलिस मुठभेड़ में मारा गया कुख्यात अपराधी, कई पार्टियों से चुनाव भी लड़ चुका था

पुलिस मुठभेड़ में मारा गया कुख्यात अपराधी, कई पार्टियों से चुनाव भी लड़ चुका था

झारखंड के गोड्डा में एक कुख्यात अपराधी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है। वह कुख्यात अपराधी पुलिस की हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था।

encounter in jharkhand godda- India TV Hindi Image Source : ANI सांकेतिक फोटो।

झारखंड में पुलिस ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गोड्डा जिले में कुख्यात अपराधी और कई मामलों में वांछित आरोपी सूर्य नारायण हंसदा उर्फ सूर्य हंसदा का एनकाउंटर कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, एनकाउंटर तब हुआ जब सूर्य हंसदा पुलिस की हिरासत से फरार होने की कोशिश कर रहा था। ये अपराधी कई पार्टियों से चुनाव भी लड़ चुका था। आइए जानते हैं इस बारे में सब कुछ।

देवघर जिले से गिरफ्तार हुआ था आरोपी

दुमका जोन के महानिरीक्षक (आईजी) शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने जानकारी दी है कि आरोपी सूर्य हंसदा कई राजनीतिक दलों के टिकट पर झारखंड विधानसभा चुनाव भी लड़ चुका था। पुलिस को झारखंड के गोड्डा और साहिबगंज जिलों में दर्ज कई आपराधिक मामलों में हंसदा की तलाश थी। गोड्डा पुलिस ने सूर्य हंसदा को रविवार को झारखंड के देवघर जिले से गिरफ्तार किया था।

कैसे हुआ एनकाउंटर?

पुलिस ने इस घटना के बारे में बताया- ‘‘हंसदा को पुलिस ने रविवार को देवघर से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने हथियारों और अपने साथियों के बारे में जानकारी दी थी। हंसदा की तरफ से दी गई जानकारी के आधार पर उसे लालमटिया वन क्षेत्र ले जाया गया और उसी दौरान उसके साथियों ने पुलिस दल पर गोलीबारी की। हंसदा ने हिरासत से भागने की भी कोशिश की और इस पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान हुई गोलीबारी में वह मारा गया।’’

कब-कब लड़ा था चुनाव?

सूर्य नारायण हंसदा ने साल 2024 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के टिकट पर राज्य की बोरियो सीट से चुनाव लड़ा था। यहां उसे सिर्फ 2,937 वोट मिले थे। इससे पहले उसने 2019 के विधानसभा चुनाव में बोरिया सीट से ही भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उसे 59,441 वोट मिले थे। वह दूसरे नंबर पर रहा था। इससे पहले हंसदा ने 2014 और 2009 में भी बोरिया सीट से ही  झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। तब भी उसे हाल मिली थी। (इनपुट: भाषा)

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